रामपुर: यूक्रेन से रामपुर पहुंचे 20 छात्र-छात्राएं, परिजनों में खुशी
रामपुर, अमृत विचार यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए रामपुर के 20 छात्र-छात्राएं काफी मुसीबतें बर्दाश्त करने के बाद रामपुर पहुंच गए हैं। छात्र-छात्राओं के पहुंचने पर परिजनों में खुशी का माहौल है। रिश्तेदारों और मिलने वालों के लगातार फोन घनघना रहे हैं। शहर के मोहल्ला घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान की वालिदा समीना …
रामपुर, अमृत विचार यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए रामपुर के 20 छात्र-छात्राएं काफी मुसीबतें बर्दाश्त करने के बाद रामपुर पहुंच गए हैं। छात्र-छात्राओं के पहुंचने पर परिजनों में खुशी का माहौल है। रिश्तेदारों और मिलने वालों के लगातार फोन घनघना रहे हैं।
शहर के मोहल्ला घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान की वालिदा समीना नादिर ने बताया कि शजा उस्मान लंबे इंतजार के बाद रविवार की शाम को रामपुर पहुंच गई हैं। शजा उस्मान के घर पहुंचने पर परिजनों में खुशी का माहौल है। रिश्तेदारों और मिलने वालों के फोन घनघना रहे हैं घर मेहमानों से भरा हुआ है। शजा ने बताया कि 24 फरवरी से खारकीव के एक बंकर में रह रहीं थीं। उनके पास खाने के लिए चाकलेट, बिस्किट और चिप्स थे। पानी की भी काफी दिक्कत थी एक मार्च को बंकर से चार दोस्तों के साथ हिम्मत करके निकलीं। चारों ओर बमबारी हो रही थी मिजाइलें इमारतों को निशाना बना रही थीं।
एक जगह इतनी बमबारी हो रही थी कि अपने बैग छोड़कर एक शेल्टर पनाह ली थी। करीब सात किमी. पैदल चलने के बाद चारों खारकीव रेलवे स्टेशन पर पहुंची। रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर एक ट्रेन निकल रही थी। इसके बाद करीब साढ़े तीन घंटे बाद लवीव के लिए ट्रेन पकड़ी। रेलवे स्टेशन पर फोर्स इंडियंस को जाने नहीं दे रही थी यूक्रेनियन को तवज्जो दी जा रही थी। लड़ झगड़कर भारतीय छात्राएं ट्रेन में सवार हो गईं। ट्रेन में करीब 22 घंटे का सफर करने के बाद लवीव पहुंची। लवीव रेलवे स्टेशन से पोलैंड बार्डर के लिए कैब हायर की। इसके लिए भी करीब ढाई घंटे इंतजार करना पड़ा। यूक्रेनियन फैमिली ने खाने के लिए कुछ ब्रेड दे दी थी।
पोलैंड बार्डर तक कैब को जाने नहीं दिया गया और तीन किमी. पैदल चलकर बार्डर तक पहुंच गए। बार्डर क्रास करते-करते तीन तारीख हो गई थी। बार्डर तक करीब तीन सौ बच्चे पहुंच गए थे। लास्ट चेक प्वाइंट क्रास नहीं दिया जा रहा था। पासपोर्ट लेने के बाद खाने के लिए मीठी ब्रेड दी। इसके बाद इमिरग्रेशन के बाद पासपोर्ट आया और फिर पोलैंड पहुंचे। इसके बाद बसों में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने बैठाया। पांच घंटे तक बस में बैठाए रखा और फिर आर्ट एंड लिविंग के आश्रम में रखा। एक रात वहां रुके इसके बाद खाना दिया और फिर एंबेसी ने दूसरे होटल में रखा। इसके बाद लिस्ट देखी उसमें पहली ही लिस्ट में शजा उस्मान और उनकी दोस्त उंजला सैफी का नाम था। दोनों बसों में बैठकर एअरपोर्ट पहुंची और भारत पहुंच गईं। शजा उस्मान का यह एमबीबीएस का तीसरा साल है।
यह छात्र भी अपने घर पहुंचे
यूक्रेन से जिला अस्पताल कालोनी निवासी सौरभ कुमार पुत्र ब्रह्म पाल सिंह, मिलक निवासी नरेंद्र गंगवार पुत्र बुद्धसैन, अमित कुमार पुत्र नेकपाल निवासी साईं विहार कालोनी, मुनीबा खान पुत्री अब्दुल शाहबाज खां निवासी लाल मस्जिद, सुभान अली पुत्र जलीस अहमद निवासी खेड़ा टांडा, सहर खान पुत्री निजामत खां निवासी नूरमहल, याह्या अब्दुल हक पुत्र इंतजामुल हक निवासी मोहल्ला ठोठर, संदीप सिंह पुत्र सुखविंदर सिंह निवासी ग्रीन पार्क बिलासपुर, शिफा बी, मोहम्मद नवाज पुत्र इमामबख्श निवासी सेंट्रल कालोनी शाहबाद गेट, चंद्र प्रकाश सिंह पुत्र मंगल सिंह, निवासी रौरा खुर्द, जमशेद रियासत पुत्र रियासत अली निवासी शाहबाद गेट,जीशान पुत्र अबुल हसन निवासी मझरा हसन, शजा उस्मान पुत्री समीना नादिर निवासी घेर सैफुद्दीन खां, अली हमजा पुत्र मोहम्मद यूनुस, घेर कलंदर खां, अनुज कुमार पुत्र वीर सिंह निवासी रफत कालोनी, उजैफा आसिफ पुत्र आसिफ शम्सी निवासी दोमहला रोड, विनय गंगवार पुत्र अंबर प्रसाद निवासी मिलक, आसिम अली पुत्र तसद्दुक हुसैन निवासी चमरौआ रामपुर पहुंच गए हैं। जबकि, आशीष कुमार पुत्र सतीश कुमार निवासी साईं विहार मुंबई पहुंच गए हैं।
