यूक्रेन से मुरादाबाद पहुंचे हसनैन और सरताज, 11 छात्रों के घर वाले अभी गुमसुम

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मुरादाबाद/अमृत विचार। यूक्रेन-रूस की जंग में फंसे भारतीय छात्रों के आने का सिलसिला जारी है। रविवार को शहर के मुगलपुरा निवासी हसनैन व ठाकुरद्वारा के मीरपुर निवासी सरताज अहमद घर पहुंच गए। लेकिन, जिन घरों के बच्चे वहां फंसे हैं, उन लोगों की धड़कन बढ़ी हुई है। परिवार वाले पल-पल मीडिया इस सूचनाओं पर टकटकी …

मुरादाबाद/अमृत विचार। यूक्रेन-रूस की जंग में फंसे भारतीय छात्रों के आने का सिलसिला जारी है। रविवार को शहर के मुगलपुरा निवासी हसनैन व ठाकुरद्वारा के मीरपुर निवासी सरताज अहमद घर पहुंच गए। लेकिन, जिन घरों के बच्चे वहां फंसे हैं, उन लोगों की धड़कन बढ़ी हुई है। परिवार वाले पल-पल मीडिया इस सूचनाओं पर टकटकी लगाए हैं। बच्चों के घर आने का इंतजार कर रहे हैं।

प्रशासन के नियंत्रण कक्ष से भी ऐसे बच्चों की नियमित निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन के रिकार्ड में अभी 11 छात्र-छात्राएं रास्ते में हैं। रविवार को कंट्रोल की ओर से दिल्ली एयरपोर्ट से बातचीत की गई। जबकि, प्रतीक्षा सूची वाले विद्यार्थियों का भी हालचाल पता किया गया। नगर मजिस्ट्रेट एमपी सिंह ने बताया कि 63 छात्रों में 52 वापस पहुंच गए है। प्रशासन यूक्रेन में फंसे बाकी छात्रों और उनके परिजनों के संपर्क में है।

उम्मीद है कि अगले दो दिन में ऐसे बाकी सभी छात्र घर आ जाएं। केंद्र सरकार द्वारा लगातार हवाई जहाज से विद्यार्थियों को लाया जा रहा है। जिले के 11 छात्र-छात्राओं का अभी इंतजार है। कुल 63 विद्यार्थियों का विवरण प्रशासन के पास है। उधर, छात्र शौर्य गोयल के घर पहुंचने पर रविवार को भाजपा पदाधिकारियों द्वारा मुलाकात की गयी। संगठन की ओर से शौर्य के घर जाकर पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं प्रेषित की गयीं। भाजपा के महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्रनाथ मिश्र, महानगर उपाध्यक्ष भाजपा विशाल त्यागी, महानगर मंत्री सर्वेश पटेल, महानगर मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने शौर्य से बात की।

घर पहुंचे छात्रों का भाजपाइयों ने किया स्वागत
अमरोहा। यूक्रेन से वापस आए छात्रों का रविवार को भाजपाइयों ने स्वागत किया। जबकि विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और कहा कि मोदी है तो मुमकिन है, की बात पक्की है। भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता रविवार को मारुफ हसन पुत्र महफूज हसन, आवास विकास कल्याणपुर रोड, मोहम्मद शाह कमाल पुत्र जमशेद कमाल मोहल्ला दानिशमंदन, वासु उपाध्याय पुत्र महबोधी प्रसाद उपाध्याय दानिशमंदन से उनके घर जाकर मिले। स्वागत करने वालों में जिलाध्यक्ष डॉ. ऋषिपाल नागर, नगर पालिका अध्यक्षा शशि जैन, जिला महामंत्री राकेश वर्मा, पूरन सिंह सैनी, चंद्रभान भाटी, विधानसभा प्रत्याशी राम सिंह सैनी, नगर अध्यक्ष प्रेम सिंह सैनी, मुकेश सक्सेना, सरदार सुरेंद्र सिंह ढिल्लो, अमित रस्तोगी, राजीव चौहान, कृष्ण कुमार, विनोद सैनी, राजेश आर्य, अंकित गुप्ता, बदन सिंह नागर आदि कार्यकर्ता शामिल रहे।

घर लौटकर केन्द्र सरकार को दिया धन्यवाद
ठाकुरद्वारा। नगर के फतेहउल्लाह गंज निवासी नदीम अहमद एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गए हुए थे। रूस और यूक्रेन के बीच एक भीषण महायुद्ध होने पर पांच दिन तक बंकरों रहकर समय गुजारा। 18 घंटे लाइन में लगकर और पैदल चलकर बॉर्डर तक पहुंचे। भारतीय दूतावास से संपर्क कर अपने देश भारत पहुंचे। नदीम अहमद ने बताया कि जैसे ही हम भारतीय दूतावास के संपर्क में आए तब हमें कोई किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हम बिना किसी खर्च के अपने घर तक सकुशल पहुंचे हैं। धन्यवाद करना चाहूंगा अपनी भारतीय सरकार का। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनसे और परिजनों से मिलकर उनके घर वापस लौटने की यात्रा को साझा किया। इसमें डॉ ओमपाल सिंह सैनी, शिवेंद्र गुप्ता शामिल थे। उधर नगर के तिकोनिया निवासी सरताज पुत्र सलीम अहमद भी यूक्रेन से दिल्ली आ गए हैं।

यूक्रेन से लौटा नावेद हैदर, परिजनों ने किया स्वागत
सैदनगली। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे कस्बा के नावेद हैदर शनिवार की रात घर आ गये, जहां परिजनों ने स्वागत किया। सैदनगली निवासी खलीक हैदर सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हैं, उनका बेटा नावेद हैदर कीव की नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस तीसरे साल का छात्र है। वहां कर्फ्यू और मार्शल ला लगने में फंस गये थे। बेटे की चिंता परिवार के सदस्यों को सता रही थी। नावेद ने बताया कि 28 फरवरी को कर्फ्यू और मार्शल-ला थोड़ी देर को रुकने के बाद वह पैदल ही लड़कों के ग्रुप में ट्रेन पकड़ने के लिए कीव के रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। वहां पर ट्रेन या तो रुक ही नहीं रही थी और रुक रही थी तो ट्रेन में सिर्फ महिलाओं, वृद्धों और बच्चों को ही बैठाया जा रहा था। पांच घंटे के इंतजार के बाद ट्रेन में जगह मिल पाई। चारों ओर बम फूटने की गोलीबारी की आवाज से दिल दहल रहा था। वहां चारों ओर आग ही आग फैली हुई थी। हर तरफ का मंजर देख लोग थरथर कांप रहे थे। बताया कि ट्रेन से आठ घंटे के सफर के बाद पोलैंड पहुंचे, वहां से लबीब के एयरपोर्ट पर पहुंचकर दूतावास में कागजात जमा कर स्वदेश के लिए रवाना हुए।

बेटा पहुंचा घर तो मित्रों संग नगाड़े के थाप पर झूम उठे पिता
रहरा। यूक्रेन में पढ़ाई कर रहा एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र पारस रविवार को घर पहुंचा तो उसके परिजनों की खुशी का ठिकाना न रहा। त्रिवेणी चीनी मिल चंदनपुर रहरा में वरिष्ठ प्रबंधक गन्ना प्रमोद कुमार सिंह का बेटा पारस यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। पारस ने बताया कि वह तीन माह पहले ही यूक्रेन गया था, वहां पर छात्रावास में रह रहे था। लेकिन, रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से ही देश वापसी की चिंता सताने लगी। आने के लिए टिकट भी करा लिया, लेकिन सभी फ्लाइट रद कर दी गई थीं। उन्होंने बताया कि पांच मार्च की रात को वह दिल्ली उतरे और रविवार दोपहर अपने घर पहुंचे। पारस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत-बहुत आभार जताया और कहा सरकार पूरी ईमानदारी के साथ छात्रों को ला रही है। एक भी रुपया खर्च नहीं हो रहा है। टिकट भी नहीं लेना पड़ रहा। चीनी मिल में उपाध्यक्ष आमोद कुमार शर्मा, टीसी रजौरिया, आरएस सहारावत, अमेज कुमार सिंह, अमरनाथ जागीरदार, संजय जायसवाल, बाबूराम सैनी,चांदवीर सिंह ने स्वागत किया। केक काटकर मुंह मीठा कराया गया और ढोल नगाड़ों की धुन पर खूब नृत्य किया।

घर लौटा चिड़ियापुर चांडक का एक छात्र
किरतपुर। रविवार की सुबह मोहम्मद शाद पुत्र हाजी अफजाल निवासी ग्राम चिड़ियापुर चांडक यूक्रेन में लविव शहर में रहता था। वह लविव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी मे एमबीबीएस के द्वितीय वर्ष का छात्र हैं। मोहोम्मद शाद के घर वापसी पर परिजनों ने मिठाई खिलाकर अपने बेटे का स्वागत किया। मोहोमद शाद ने बताया कि यूक्रेन में अभी भी भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। ऑपरेशन गंगा के तहत हमारी स्वदेश वापसी हुई है।

सलमान घर पहुंचा तो परिवार में लौट आईं खुशियां
हसनपुर। नगर के मोहल्ला कुरैशियान निवासी सलमान अजमल रविवार को घर पहुंचा। यूक्रेन से वापसी के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। सलमान यूक्रेन की राजधानी कीव की टर्नोलिप इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस पांचवें वर्ष के छात्र हैं। वह बीते साल 15 सितंबर वहां गये थे। घर वापसी के दौरान के हालातों की चर्चा में कहते है कि भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने कोई मदद नहीं की। 24 फरवरी को धमाकों की आवाज सुनाई दी तो छात्र यूनिवर्सिटी के बंकरों में छुपा दिये गये। इसके बाद छात्र ट्रेन से कोपल पहुंचे। वहां से बस द्वारा स्लोवाकिया वार्डर पहुंचे। 23 छात्रों के द्वारा 1.25 लाख रुपये बस किराये के लिए चुकाने पड़े। वहां स्लोवाकिया में सभी ने चार दिन बिताया जबकि स्लोवाकिया स्थित भारतीय दूतावास ने अच्छी व्यवस्था कर रखी थी।

बेटे को घर लाने के लिए दिल्ली में डेरा डाले थे माता-पिता
हल्दौर। क्षेत्र के पैजनिया निवासी एमबीबीएस छात्र कार्तिक त्यागी यूक्रेन से रविवार को घर पहुंच गए। इसके बाद से कार्तिक के घर वाले खुश हैं। डॉ. पवनीश त्यागी के पुत्र कार्तिक वहां के डीनी प्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। वह पांच माह पहले यूक्रेन गए थे। दंपति पुत्र के यूक्रेन से शीघ्र सुरक्षित वापसी को लेकर दिल्ली एयरपोर्ट पर डेरा डाले थे। शनिवार को कार्तिक दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे तो पिता माता राजकुमारी खुशी से झूम उठे। बेटे ने माता-पिता को बताया कि यूक्रेन में उसके हॉस्टल से करीब तीन किलोमीटर दूर मिसाइल दागी गई थी। रोमानिया और यूके एनजीओ ने शेल्टर हाउस में ठहरे छात्र छात्राओं को खानपान सामग्री की व्यवस्था कराई थी। छात्र को दिल्ली से शनिवार की देर रात उसके गांव पैजनिया ले आये।

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