लखनऊ: परिस्थितियों से लड़कर बनीं डॉक्टर, अब साइलेंट वर्कर बनकर मरीजों को पहुंचा रहीं राहत
लखनऊ। किसी को मेहनत पर भरोसा होता है, तो किसी को किस्मत पर, लेकिन जिन्हें अपनी कड़ी मेहनत पर यकीन होता है, वह किस्मत के भरोसे बैठना पसंद नहीं करते। ऐसे लोगों के जीवन में हालात और मुश्किलें चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हों वह नामुमकिन को भी मुमकिन कर जाते हैं। कुछ इसी …
लखनऊ। किसी को मेहनत पर भरोसा होता है, तो किसी को किस्मत पर, लेकिन जिन्हें अपनी कड़ी मेहनत पर यकीन होता है, वह किस्मत के भरोसे बैठना पसंद नहीं करते। ऐसे लोगों के जीवन में हालात और मुश्किलें चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हों वह नामुमकिन को भी मुमकिन कर जाते हैं। कुछ इसी तरह का जज्बा केजीएमयू की उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रज्ञा पाण्डेय का भी है, जिन्होंने अपनी जिंदगी की समस्याओं को अपने पांव की बेड़ियां नहीं बनने दिया।
केजीएमयू की पहली महिला उप चिकित्सा अधीक्षक हैं डॉ. प्रज्ञा
डॉ. प्रज्ञा की पारिवारिक परिस्थितियां और कड़ी मेहनत ने उन्हें साधारण महिला से खास बना दिया। वह डॉक्टर बनीं और अब मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रही हैं। इसके अलावा इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि वह केजीएमयू की पहली महिला उप चिकित्सा अधीक्षक भी हैं।
डॉ. प्रज्ञा का जन्म कानपुर में हुआ था। डॉ. प्रज्ञा के माता व पिता दोनों शिक्षक रहे, जिस वजह से बचपन से ही इनको पढ़ने लिखने का शौक रहा। अपनी स्कूली शिक्षा कानपुर से पूरी करने के बाद इनका दाखिला केजीएमयू में हो गया, जहां से इन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की और यहीं पर इनकी मुलाकात डॉ. ब्रूस से हुई, इसके बाद डॉ. प्रज्ञा तथा डॉक्टर ब्रूस ने शादी कर ली, उस दौरान डॉ. प्रज्ञा को केजीएमयू में कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री विभाग में एक डॉक्टर के रूप में चुना गया था, लेकिन वह मणिपुर चली गईं।
2015 में पता चला कि पति को है ब्रेन ट्यूमर
लेकिन साल 2015 में डॉ. ब्रूस को ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला, दो साल तक उनकी कीमोथैरेपी चली, सभी डॉक्टरों ने उम्मीदें छोड़ दीं। उसके बाद भी डॉ. प्रज्ञा ने हौसला नहीं खोया और वह प्रयास करती रहीं। इसी बीच कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। काफी प्रयासों के बाद भी डॉ. ब्रूस को नहीं बचाया जा सका।
यह डॉ. प्रज्ञा के जीवन का सबसे कठिन समय था, उस समय उनका बेटा सिर्फ 10 साल का था, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में डॉं. प्रज्ञा का साथ उनके माता-पिता ने दिया। डॉ. प्रज्ञा ने केजीएमयू में दोबारा आवेदन किया और कुछ समय बाद वह केजीएमयू में शामिल हो गईं। इस समय वह कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. प्रज्ञा को किया गया है सम्मानित
डॉ. प्रज्ञा ने कोरोना महामारी के दौरान अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए एचआर कमेटी का भी काम देखा। बता दें कि केजीएमयू की एचआर कमेटी, केजीएमयू परिसर में बने कोविड वार्डो में भर्ती मरीजों के लिए चिकित्सकीय टीम को तैनात करने का काम करती रहीं हैं। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था। इससे पहले भी डॉ. प्रज्ञा को कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। डॉ. प्रज्ञा जिला स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी भी हैं।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर डॉ. प्रज्ञा ने पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए कहा है कि पुरुषों को महिलाओं को कमजोर नहीं समझना चाहिए। वहीं महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करना चाहिए और अन्य महिलाओं को भी आगे बढाने में प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।
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