मुरादाबाद : शहर की खतरनाक सड़कें लिख रही हैं हादसों की इबारत, बीते एक साल में गई 292 लोगों की जान, 401 घायल भी हुए
सौरभ सिंह/ मुरादाबाद। शहर की जर्जर सड़कें लगातार हादसों की इबारत लिख रही हैं। केवल शहरी क्षेत्र में ही औसतन तीन हादसे प्रतिदिन हो रहे हैं, जबकि जिले में इन हादसों का औसत पांच है। इन हादसों में रोजाना दस से अधिक लोग घायल हो रहे हैं। इनमें एक दो लोगों को गंभीर स्थिति में …
सौरभ सिंह/ मुरादाबाद। शहर की जर्जर सड़कें लगातार हादसों की इबारत लिख रही हैं। केवल शहरी क्षेत्र में ही औसतन तीन हादसे प्रतिदिन हो रहे हैं, जबकि जिले में इन हादसों का औसत पांच है। इन हादसों में रोजाना दस से अधिक लोग घायल हो रहे हैं। इनमें एक दो लोगों को गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। गनीमत है कि इन हादसों में फिलहाल मौत का औसत एक से थोड़ा नीचे है। यह स्थिति उस समय है जब उत्तर प्रदेश सरकार हादसों की संख्या कम करने और इन हादसों में मौत की संख्या शून्य करने के लिए अभियान चला रही है।
शहर समेत जिले भर की सड़कें बेहद खराब स्थिति में हैं। रामपुर रोड, कांठ रोड लंबे समय से खराब हैं और इनमें कई जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। कांठ रोड पर तो लोक निर्माण विभाग ने पैचवर्क का काम शुरू कर दिया है, जबकि रामपुर रोड की मरम्मत के लिए करीब तीन पहले ही एनएचएआई ने दस करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर लोक निर्माण विभाग को काम शुरू करने के लिए कह दिया था। हालांकि तकनीकी दिक्कतों की वजह से अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
हादसे रोकने के लिए बनी हैं सड़क सुरक्षा समिति
जिले में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित है। जिसमें परिवहन विभाग नोडल है। जबकि ट्रैफिक पुलिस, एमडीए, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी इसमें सदस्य हैं। समिति की बैठक हर महीने होती है। वहीं मंडल स्तर पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हर तीन महीने पर बैठक होती है। इसमें सड़क हादसों में कमी लाने के उपायों पर मंथन किया जाता है।
अगस्त और नवंबर माह सबसे खतरनाक
सड़क हादसों की दृष्टि से साल के दो महीने अगस्त और नवंबर बेहद खतरनाक हैं। बीते तीन सालों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं इन्हीं दो महीनों में हुई हैं। बीते साल भी अगस्त और नवंबर महीने में सबसे अधिक 52-52 दुर्घटनाएं हुई थीं। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक इन महीनों में सड़कों पर भीड़ समान्य से अधिक होती है। नवंबर माह में हल्का कोहरा भी हादसे की वजह बनता है।
एक साल में हुए 524 हादसे
बीते एक साल में गंभीर स्तर के कुल 524 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 401 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 292 की मौत हो गई। इनमें से ज्यादातर मौतें मौके पर हुई हैं। वहीं कुछेक घायलों को अस्पताल ले जाते मौत हुई है।
कई साल से हादसों की वजह बनी हैं सड़कें
सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में कई साल से लगातार हादसों की मुख्य वजह सड़कों की हालत को माना जा रहा है। पिछली बैठक में जिले में कुल 10 प्वाइंट तय किए गए थे। जहां हादसे ज्यादा हो रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक इस बैठक के बाद इन सभी प्वाइंटों पर कुछ सुधार किया गया। इससे इनमें से तीन प्वाइंट तो अब खत्म हो चुके हैं, लेकिन सात से आठ नए प्वाइंट बन गए हैं। समिति के अधिकारी अब नए सिरे से इन प्वाइंट का निर्धारण करने में जुटे हैं।
यातायात पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि पूरे जिले में सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। इसके चलते एक साल में कुल 524 हादसे हुए हैं। इनमें 292 लोगों की मौत हुई है, जबकि 401 लोग घायल हुए हैं। सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में यह मुद्दा लगातार उठाया जाता है।
