लखनऊ: सरकारी योजनाओं ने बदला गणित, आधी आबादी ने प्रदेश में बनाई नई तस्वीर
लखनऊ। कोरोना काल में विपक्ष का भाजपा सरकार पर निशाना, किसानों की समस्या या फिर आवारा पशुओं का मुद्दा। यह सभी 10 मार्च को समाप्त दिखे । प्रदेश में भाजपा को एक बार फिर प्रचंड बहुमत मिला और वह सरकार बनाने जा रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान तरह-तरह की तस्वीर सामने आई, राजनीतिक दल …
लखनऊ। कोरोना काल में विपक्ष का भाजपा सरकार पर निशाना, किसानों की समस्या या फिर आवारा पशुओं का मुद्दा। यह सभी 10 मार्च को समाप्त दिखे । प्रदेश में भाजपा को एक बार फिर प्रचंड बहुमत मिला और वह सरकार बनाने जा रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान तरह-तरह की तस्वीर सामने आई, राजनीतिक दल अपने-अपने जीत का दावा करते रहे । लेकिन सरकारी योजनाओं की वजह से आधी आबादी यानी कि तथा वंचित समाज ने मिलकर चुनाव परिणाम की गणित बदल कर रख दी और राजनीति की नई तस्वीर बनायी।
यह कहना है उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के चेयरमैन डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल का
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरे प्रदेश के अंदर चौमुखी विकास हुआ है, यही नहीं पहली बार सरकार के विकास की योजनाएं धरातल पर दिखाई पड़ी हैं, उन प्रमुख योजनाओं की बात करें तो उनमें आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, सौभाग्य उज्जवला तथा आयुष्मान आदि योजनाएं शामिल रहीं, यह सभी योजनाएं शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंची।
इतना ही नहीं इन योजनाओं का लाभ बिना किसी धर्म व जाति भेद के सभी लोगों को मिला। डॉक्टर लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा की इस बार के चुनाव में अनुसूचित जातियों का बड़ा झुकाव भारतीय जनता पार्टी के तरफ रहा है, उसका सबसे बड़ा कारण 70 से 80 प्रतिशत लाभार्थी दलित और वंचित समाज के रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं ने क्रांति की है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि एक नया वर्ग बना, जिसने मुखर होकर बीजेपी की जीत में बड़ा योगदान किया। उन्होंने कहा कि अभी तक जातियों के आधार पर वर्ग बनते थे,लेकिन इन सरकारी योजनाओं ने प्रदेश की आधी आबादी यानी महिलाओं का एक वर्ग बना दिया। उन्होंने कहा कि आवास, राशन कार्ड तथा गैस सिलेंडर यह सभी ज्यादातर महिलाओं के नाम पर रहे। इन योजनाओं की लाभार्थी महिलाओं ने मुखर होकर मतदान किया।जिससे राजनीत की तस्वीर बदल गई।
इस दौरान डॉ लालजी निर्मली ने यह भी कहा कि किसान की जो समस्या थी, कृषि कानून उसका बिल वापस हो गया। लेकिन उसके बाद भी कुछ राजनीतिक दलों ने इस प्रकरण को समाप्त होने नहीं दिया, उन्होंने इसको राजनीतिक मुद्दा बनाए रखा। आवारा पशुओं की भी समस्या उठाई गई। लेकिन जनता ने डेवलपमेंट, सरकारी योजनाओं, भयमुक्त समाज को देखते हुए सारी समस्या को नकार दिया।
