जानें किस दिन है होलिका दहन, भद्रा के कारण बना हुआ है संशय
होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है और इसके अगले दिन रंग-अबीर से होली खेली जाती है। इस बार भद्राकाल के कारण होलिका दहन और प्रतिपदा तिथि के कारण होली की तारीख के शुभ समय को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। होलिका दहन करने से पहले होली की पूजा …
होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है और इसके अगले दिन रंग-अबीर से होली खेली जाती है। इस बार भद्राकाल के कारण होलिका दहन और प्रतिपदा तिथि के कारण होली की तारीख के शुभ समय को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। होलिका दहन करने से पहले होली की पूजा विधि-विधान से की जाती है। ऐसा माना जाता है इससे सारी परेशानियां दूर होती हैं और घर में शांति आती है. इस दिन को लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं।
क्यों भ्रदा में नहीं होगा दहन
हिंदू शास्त्रों में भद्राकाल को अशुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भद्राकाल में किया गया कोई भी काम सफल नहीं होता और उसके अशुभ परिणाम मिलते हैं। इस बार दो दिन पूर्णिमा तिथि दो दिन पड़ रही है यानि 17 और 18 मार्च को। पूर्णिमा तिथि पर भद्राकाल होने के कारण लोगों में होली और Holika Dahan को लेकर संशय बना हुआ है। हिंदू धर्म ग्रन्थों के अनुसार, होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में सूर्यास्त के बाद करना चाहिए लेकिन यदि इस बीच भद्राकाल हो, तो भद्राकाल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। इसके लिए भद्राकाल के समाप्त होने का इंतजार करना चाहिए। होलिका दहन के लिए भद्रामुक्त पूर्णिमा तिथि का होना बहुत जरूरी है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार होलिका दहन 2022 तिथि – 17 मार्च 2022, गुरुवार की है। Holika Dahan का शुभ मुहूर्त 17 मार्च को रात 9:20 बजे से 10:31 बजे के बीच रहेगा। होलिका दहन का समय लगभग 1 घंटा 10 मिनट का होगा। इस दौरान होलिका की पूजा करना लाभकारी रहेगा।
जानें होली कब है?
पूर्णिमा तिथि में चूंकि चंद्रमा का महत्व होता है, इसलिए इसमें उदय काल का महत्व नहीं माना जाता। ऐसे में पूर्णिमा तिथि 17 मार्च को ही मान्य होगी और 17 मार्च की रात को Holika Dahan के बाद 18 मार्च को प्रतिपदा तिथि में रंगों की होली खेली जा सकेगी। वहीं कुछ कुछ जगहों पर 18 और 19 मार्च को दोनों दिन रंगों की होली खेली जाएगी।
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