लखनऊ: फर्जी कार एजेंसी मालिक बनकर बैंकों को करोड़ों का चूना लगाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
लखनऊ। विभिन्न कार एजेंसियों के मालिक बनकर व्हाट्स एप या वर्चुअल नंबर से फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर विभिन्न बैंकों व कार एजेंसियों से नेट बैंकिंग के माध्यम से करोड़ों रुपयों की ठगी करने वाले शातिर गिरोह का यूपी एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया गया है। एसटीएफ लखनऊ की टीम ने इस गिरोह के सरगना समेत …
लखनऊ। विभिन्न कार एजेंसियों के मालिक बनकर व्हाट्स एप या वर्चुअल नंबर से फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर विभिन्न बैंकों व कार एजेंसियों से नेट बैंकिंग के माध्यम से करोड़ों रुपयों की ठगी करने वाले शातिर गिरोह का यूपी एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया गया है।
एसटीएफ लखनऊ की टीम ने इस गिरोह के सरगना समेत चार अभियुक्तों को विभूतिखंड थाना क्षेत्र में एचडीएफसी के एटीएम के पास से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों ने गिरोह सरगना बिहार के सिवान जिले का रहने वाला रानू सिंह, गोपालगंज निवासी राहुल कुमार सिंह, निहाल कुमार सिंह व पंकज कुमार शामिल हैं।
एसटीएफ की ओर से बताया गया कि गत 19 जनवरी को एसआरएम स्मार्ट हूप्स प्रा. लि. यानी लखनऊ की मर्सिडीज बेंज कार एजेंसी का निदेशक बनकर, सुगोई मोटर्स प्रा. लि. व दिल्ली की होंडा कार एजेंसी का चीफ फाइनांस ऑफीसर बनकर आरटीजीएस के माध्यम से 14 फर्जी बैंक खातों का प्रयोग कर 18 लाख 40 हजार रुपए व 58 लाख रुपए की ठगी की गई। मामले की जानकारी होने के बाद एसटीएफ की ओर से बैंकों से संपर्क कर 25 लाख 63 हजार 200 रुपए खातों में फ्रीज करवा दिये गए।
एसआरएम स्मार्ट हूप्स प्रा. लि. (मर्सिडीज बेंज कार एजेंसी, लखनऊ) के अकाउंटेंट उत्तम कुमार ने बीबीडी थाना में प्राथमिकी दर्ज करके बताया था कि आरोपियों ने कंपनी के निदेशक की फोटो लगाकर एक व्हाट्स एप नंबर से आरटीजीएस की डिटेल व दो चेकों की फोटो मांगी गई। इसके बाद पीएनबी के मैनेजर का फोन आया कि आपकी कंपनी निदेशक ने चेक भेजकर 18 लाख 40 हजार का आरटीजीएस कराया है। पर जब डायरेक्टर से पूछा गया तो उन्होंने इनकार कर दिया। तब जाकर ठगी का पता चला।
लूट और हत्या के प्रयास में जेल जा चुका है रानू
गिरोह सरगना रानू ने बताया कि वह सितंब 2020 में सिवान के बढ़रिया थाना क्षेत्र में कैश व बाइक लूट और एक व्यक्ति को गोली मारने के मामलों में जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद गोपालगंज निवासी सुमित शर्मा से नवंबर 2021 में मुलाकात हुई। जिसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खातों से पैसे निकालने के काम का आइडिया दिया।
इसके बाद रानू ने गिरोह बनाकर दिसंबर 2021 में गोपालगंज के आईसीआईसीआई एटीएम से साढ़े चार लाख रुपए और छह लाख रुपए निकाले थे। वहीं दो व तीन जनवरी 2022 को सिवान से तीन लाख, 19 जनवरी को दिल्ली में 13 लाख रुपए, 10 से 15 जनवरी के बीच गोपालगंज से एक लाख 98 हजार रुपए, 28 फरवरी से दो मार्च के बीच दिल्ली के मयूर विहार से साढ़े चार लाख रुपए, पांच मार्च को दिल्ली के निजामुद्दीन से साढ़े नौ लाख रुपए और नौ मार्च को लखनऊ के गोमती नगर से छह लाख रुपए निकाले। इसके बाद सभी गोपालगंज फरार हो गए। रविवार को फिर से सभी लखनऊ में एटीएम से पैसे निकालने आए थे, पर पकड़े गए।
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