उन्नाव: रंगीन पापड़ व चिप्स बिगाड़ सकते हैं आपकी सेहत, इन बातों का रखें ध्यान तो नहीं होगा नुकसान
उन्नाव। होली के त्योहार पर गुझिया के साथ चिप्स व पापड़ न हो तो मजा किरकिरा हो जाता है। घर आए मेहमान की खतिरदारी के लिए प्लेट की सजावट में रंगीन चिप्स, पापड़ कचरी आदि से की जाती है। चटक रंग से तैयार यह खाद्य सामग्री प्लेट की शोभा तो बढा देते है। लेकिन सेहत …
उन्नाव। होली के त्योहार पर गुझिया के साथ चिप्स व पापड़ न हो तो मजा किरकिरा हो जाता है। घर आए मेहमान की खतिरदारी के लिए प्लेट की सजावट में रंगीन चिप्स, पापड़ कचरी आदि से की जाती है। चटक रंग से तैयार यह खाद्य सामग्री प्लेट की शोभा तो बढा देते है। लेकिन सेहत के लिए उतने ही खतरनाक साबित होते है। क्योंकि चटक रंग वाले चिप्पस पापड़ व कचरी में अखाद्य रंगों का प्रयोग किया जाता हैं। जिससे पेट तो खराब हो सकता है, लीवर और किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
होली का पर्व आने से पहले ही घर घर चिप्स पापड़ आदि बनाना शुरू हो जाता था। लेकिन बदलते समय के साथ वक्त की कमी के कारण रेडीमेड का प्रचलन बढ गया है। डिमांड होने से फुटपाथ पर भी दुकानें सज गई हैं। बाजार में अभी से चटख रंग वाले चिप्स पापड़ व कई तरह की अन्य सामग्री बिक रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के विशेषज्ञ कहते हैं चटक रंग वाले चिप्स पापड़ों का सेवन मानव जीवन के लिए खतरनाक है। लेकिन, खाद्य सुरक्षा विभाग अभी इनकी बिक्री रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है। जबकि चिकित्सक और खाद्य सुरक्षा अधिकारी दोनों का ही कहना है अखाद्य रंगों के सेवन से सेहत को खतरा भी ऐसा कि किडनी और लिवर तक खराब कर दें। फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग इन पर शिकंजा कसने के नाम पर नमूने लेकर कोरम पूरा कर रहा है।
रंगीन पापड़ और चिप्स से ज्यादा खतरा
खूबसूरती बढाने के लिए खरीदारों में गहरे रंग वाले डिजायनर चिप्स पापड़ व कचरी आदि लोगों की पहली पसंद बने हैं। इन दिनों बाजार में चटख रंग से तैयार आलू, चावल, व साबूदाना से निर्मित चिप्स पापड़ आदि की डिमांड भी बहुत है। जानकारों की माने तो खाद्य रंग 125 से लेकर 160 रुपया का 50 ग्राम का डिब्बा आता है। जबकि अखाद्य रंग 50 से 70 रुपया डिब्बा आता है।
अखाद्य रंग से बिगड सकती है सेहत
चेस्ट फिजीशियन डॉ. शोभित अग्निहोत्री ने बताया कि अखाद्य रंग केमिकल से बनाए जाते हैं। इन सिथेटिक रंगों में जो केमिकल डाला जाता है उसका सीधा असर किडनी और लिवर पर पड़ता है। केमिकल की वजह से आंतों में भी घाव होने का खतरा रहता है। पेट तो कभी भी खराब हो सकता है।
क्या कहते है अधिकारी
मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रयास है कोई भी मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री नही होने दी जाएगी। रंगीन पापड़ व कचरी आदि की जांच कराई जाएगी।
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