विश्व प्रसन्नता दिवस: क्या है इस दिन का महत्व, प्रसन्नता में कहां आ रही दिक्कतें
लखनऊ। चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कुराहट पाने की सारी कवायद, उसके बाद भी परेशान रहता है इंसान। खुशी, प्रसन्नता या फिर मुस्कान जो भी नाम दें, बस इसी की चाहत में जिस रास्ते पर हम निकले थे, वह रास्ता भी हमें खुशी की मंजिल से दूर करता जाता है। मौजूदा दौर में यह बातें …
लखनऊ। चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कुराहट पाने की सारी कवायद, उसके बाद भी परेशान रहता है इंसान। खुशी, प्रसन्नता या फिर मुस्कान जो भी नाम दें, बस इसी की चाहत में जिस रास्ते पर हम निकले थे, वह रास्ता भी हमें खुशी की मंजिल से दूर करता जाता है। मौजूदा दौर में यह बातें ज्यादातर लोगों के मन में उठती रहती हैं,अब सवाल उठता है कि आखिर आज के दिन ऐसी बातें क्यों की जा रही है, तो आपको बता दें कि आज यानी 20 मार्च के दिन अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है।
आज के दिन को विश्व खुशी दिवस भी कहा जाता है। जो प्रसन्नता जीवन का अभिन्न अंग है, हम उसी से आज इतना दूर होते जा रहे हैं कि हमें वर्ष में 1 दिन अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस के रूप में मनाना पड़ता है। भागदौड़ भरी दुनिया में कुछ पाने के लिए लोग बहुत कुछ खोते जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस बार संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस की थीम फिर से खुशियों का निर्माण करें रखी है। इस बार दुनिया को कोरोना वायरस की महामारी से उबारने पर जोर दिया जा रहा, क्योंकि इस महामारी ने लोगों को हर स्तर पर परेशान किया है।
आइए जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोग जीवन में प्रसन्नता के लिए क्या कर रहे हैं और प्रसन्न रहने में क्या आ रही है दिक्कतें।
भूलते जा रहे हैं संतोषम परम सुखम
उत्तर प्रदेश फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव बताते हैं कि हम भूलते जा रहे हैं संतोषम परम सुखम की बात। यही सबसे बड़ा कारण है प्रसन्न न रहने का।
वह बताते हैं कि लोग अपने से ज्यादा समृद्ध लोगों को देखकर तुलना करते हैं,इस वजह से परेशान रहते हैं।
प्रसन्नता अंदर की चीज
एसजीपीजीआई के डॉ बृजेश त्रिपाठी बताते हैं कि प्रसन्नता बाहर की चीज नहीं है बल्कि अपने अंदर प्रसन्नता को पाया जा सकता है।
दूसरे के चेहरे पर खुशी देखकर आती है प्रसन्नता
टीआरसी लॉ कॉलेज के डॉ रंजन मिश्रा बताते हैं कि दूसरे के चेहरे पर खुशी देखकर प्रसन्नता मिलती। वह प्रसन्नता में सबसे बड़ा बाधक आगे बढ़ने की चाहत को मानते हैं। वह बताते हैं कि अपने आप को आगे बढ़ाने के लिए स्केल में बांध लेता है,जो समस्या का बड़ा कारण है।
हर दिन प्रसन्नता का
बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ शुचिता चतुर्वेदी के मुताबिक भारतीय संस्कृति में हर दिन प्रसन्नता का है। हमारे देश की संस्कृति हर दिन उत्साहवर्धन करने वाली संस्कृति है। यहां हर दिन प्रसन्नता दिवस है।
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