रामपुर : रजा लाइब्रेरी में प्रदर्शित हुआ अमर शहीदों का इतिहास
रामपुर, अमृत विचार। विश्व प्रसिद्ध रजा लाइब्रेरी में शहीद दिवस पर अमृत महोत्सव के तहत अमर शहीदों की याद में पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई। यह प्रदर्शनी दो अप्रैल तक चलेगी। इसमें शहीद भगत सिंह पंडित रामप्रसाद बिस्मिल मंगल पांडे, भारतीय महारानी लक्ष्मीबाई इत्यादि महापुरुषों पर लिखी गई पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी का मुख्य …
रामपुर, अमृत विचार। विश्व प्रसिद्ध रजा लाइब्रेरी में शहीद दिवस पर अमृत महोत्सव के तहत अमर शहीदों की याद में पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई। यह प्रदर्शनी दो अप्रैल तक चलेगी। इसमें शहीद भगत सिंह पंडित रामप्रसाद बिस्मिल मंगल पांडे, भारतीय महारानी लक्ष्मीबाई इत्यादि महापुरुषों पर लिखी गई पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी का मुख्य अतिथि राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सैयद मोहम्मद अरशद रिजवी ने शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लगभग 200 वर्षों तक गुलामी की जजीरों के जकड़े रहने के पश्चात सन् 1947 में अंग्रेजी हुकूमत से देश को स्वतंत्रता मिली। यह स्वतंत्रता इतनी आसान नहीं थी। आजादी की कीमत के रूप में भारत को एक नहीं दो नहीं बल्कि लाखों कुर्बानियां देनी पड़ी थीं और इन शहीदों एवं वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए सम्पूर्ण भारत में शहीद दिवस मनाया जाता है।
रजा लाइब्रेरी में देश की स्वतंत्रता में अपने प्राणों का बलिदान एवं योगदान करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों से सम्बन्धित पुस्तकों की प्रदर्शनी का उद्घाटन डा. सैयद मोहम्मद अरशद रिजवी ने डॉ. अबुसाद इस्लाही, लाइब्रेरी एवं सूचना अधिकारी ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 23 मार्च को लोग देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने वाले और वीरता के साथ लड़ने वाले ऐसे नौजवान सेनानियों एवं क्रान्तिकारियों की वीर गाथाओं के किस्से सुनाते हैं। कहा कि 23 मार्च को तीन क्रान्तिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया था।
बहुत ही कम आयु में इन वीरों ने अपने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। अनेकों युवा भारतीयों के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव प्रेरणा स्रोत बने हैं। उनकी कुर्बानियां आज भी देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है और नौजवानों के दिलों में देश पर कुर्बान होने का जज्बा भरती है। यही जज्बा है जो भारत के दुश्मनों के दिल में आज भी दहशत भर देता है। क्योंकि, आज हमारा देश परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है। कहा कि जब निहत्थे भारतीयों ने अंग्रेजों को मार भगाया तो शक्ति सम्पन्न होने के बाद भारत कितनी बड़ी शक्ति है यह बात हर भारत का दुश्मन जानता है।
आजादी के हर नायक पर कार्यक्रम करेगी लाइब्रेरी
लाइब्रेरी एवं सूचना अधिकारी डा. अबुसाद इस्लाही ने कहा कि रजा लाइब्रेरी अमृत महोत्सव के अन्तर्गत देश की आजादी से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं पर प्रदर्शनी एवं व्याख्यान कार्यक्रम करने के लिए प्रयासरत है। हमारी हर सम्भव कोशिश रहेगी कि आजादी में अपना योगदान करने वाले प्रत्येक क्रान्तिकारी, स्वतंत्रता सेनानी के विषय पर कार्यक्रम आयोजित कर आमजन को जानकारी प्रदान करें। इस अवसर पर शहीद भगत सिंह, काला पानी (गुमनाम मुजाहिद्दीन जंगे आज़ादी 1857), भगत सिंह और स्वतंत्रता संग्राम, गांधी एक असम्भव संभावना नेता जी सुभाषचन्द्र बोस, कमयोगी लालबहादुर शास्त्री, महात्मा गांधी, गांधी और अम्बेडकर, रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा, महानायक मंगल पाण्डे, भारतीय मुस्लिम वीरांगनाएं, रानी लक्ष्मीबाई इत्यादि पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी 23 मार्च से दो अप्रैल तक प्रदर्शित रहेगी।
