लखनऊ: शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है टीबी, विशेषज्ञों से जानें बचाव के उपाय
लखनऊ। टीबी यानी की क्षय रोग एक गंभीर बीमारी है, जो माइकोबैक्टेरियम टूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया से फैलता है ,देश में लगभग 40 प्रतिशत आबादी टीबी संक्रमण से ग्रसित है,टीबी बैक्टीरिया की खोज साल 1982 में 24 मार्च को हुई थी, इसलिए 24 मार्च के दिन विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है,यह कहना है केजीएमयू के …
लखनऊ। टीबी यानी की क्षय रोग एक गंभीर बीमारी है, जो माइकोबैक्टेरियम टूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया से फैलता है ,देश में लगभग 40 प्रतिशत आबादी टीबी संक्रमण से ग्रसित है,टीबी बैक्टीरिया की खोज साल 1982 में 24 मार्च को हुई थी, इसलिए 24 मार्च के दिन विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है,यह कहना है केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ.वेद प्रकाश का।
उन्होंने यह बातें विश्व टीबी दिवस से एक दिन पहले विभाग में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बतायी। उन्होंने बताया कि टीबी रोग से साल 2022 में करीब 15 लाख लोगों की मौत हो गयी थी। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में टीबी मृत्यु का 13वां प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में करीब एक करोड़ लोग टीबी रोग से बीमार है,जिसमें 56 लाख पुरुष 33 लाख महिलाएं और 11 लाख बच्चे शामिल हैं।

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बच्चों तथा किशोरों को टीबी होने पर अक्सर स्वास्थ्य प्रदाताओं द्वारा अनदेखा कर दिया जाता है। जिससे आगे चलकर उपचार करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया,फिलीपींस, पाकिस्तान,नाइजीरिया, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका से ज्यादा टीबी के मरीज भारत में पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि साल 2025 तक भारत टीबी मुक्त हो जाए, इसके लिए सबको मिलकर साथ काम करना पड़ेगा।
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत केजीएमयू के पलमोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग ने मलिहाबाद स्थित कसमंडी कलां गांव तथा टीबी रोग से ग्रसित 30 बच्चों को गोद लिया है। विभाग द्वारा गांव के लोगों को टीबी समेत अन्य बीमारियों को लेकर जागरूक किया जाएगा, साथ ही टीबी ग्रसित बच्चों को पोषण तथा इलाज मुहैया कराया जाएगा।
इस अवसर पर केजीएमयू के रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर आर.एस. कुशवाहा ने बताया कि टीबी के बैक्टीरिया सांस द्वारा शरीर के अंदर जाते हैं, रोगी के खांसने, बात करने, छीकने,थूकने से दूसरे लोगों में इसका संक्रमण होता है,इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि मरीज के मुंह पर कपड़ा या मास्क रखा जाए, इससे संक्रमण से बचाव होता है।
उन्होंने बताया कि टीबी रोग केवल फेफड़ों में ही नहीं होता,बल्कि शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है, उन्होंने बताया कि इस रोग की वजह से महिलाओं में बांझपन की समस्या आ रही है। उन्होंने बताया कि 60 से 80 प्रतिशत बांझपन का कारण टीबी रोग होता है। इसके अलावा टीबी रोग आंख,हड्डी, पेट तथा दिमाग तक को प्रभावित करता है।
टीबी रोग के लक्षण
डॉ.आर. एस. कुशवाहा ने बताया कि दो हफ्तों से ज्यादा खांसी आना, बलगम आना, बलगम के साथ रक्त आना, सीने में दर्द होना, बुखार आना, भूख तथा वजन तेजी से कम होना, यदि इस तरह के लक्षण किसी में दिखाई पड़ रहे हों, तो तत्काल उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए,यह टीबी के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि टीबी का इलाज सम्भव है।
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