पीलीभीत: हाथियों को लाने कि राह में रोड़ा बनी आचार संहिता, टेंडर लटका

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 पीलीभीत, अमृत विचार । पीटीआर में गश्त करने के लिए कर्नाटक से हाथियों को लाने की कवायद में कोई न कोई रोड़ा बन रहा है। आचार संहिता लागू होने की वजह से उनके लाने के लिए होने वाली टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर लटक गई है। अफसरों का कहना है कि आचार संहिता हटने के …

 पीलीभीत, अमृत विचार । पीटीआर में गश्त करने के लिए कर्नाटक से हाथियों को लाने की कवायद में कोई न कोई रोड़ा बन रहा है। आचार संहिता लागू होने की वजह से उनके लाने के लिए होने वाली टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर लटक गई है। अफसरों का कहना है कि आचार संहिता हटने के बाद ही टेंडर हो सकेगा जिसके बाद हाथियों को लाने के लिए टीम भेजी जाएगी।

तीन साल पहले पीटीआर के अफसरों ने कर्नाटक से हाथियों को मंगवाने का निर्णय लेते हुए कर्नाटक सरकार को 12 हाथी देने का प्रस्ताव भेजा गया था। लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद कर्नाटक सरकार ने पीटीआर को छह हाथी देने को हामी भर दी थी। इसके बाद टाइगर रिजर्व की ओर से 11 दिसंबर को मुख्य वन संरक्षक गणेश भट्ट, डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल, एसडीओ माला सत्यपाल प्रसाद, पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार और दुधवा नेशनल पार्क में कार्यरत महावत मोहम्मद इरशाद कर्नाटक पहुंचे थे।

जहां उन्होंने कर्नाटक के बांधीपुर नेशनल पार्क में तीन नर और तीन मादा हाथियों का चयन किया था। लेकिन बजट न मिलने की वजह से मामला अधर में लटक गया था। फरवरी माह में हाथियों को लाने के लिए शासन ने 50 लाख का बजट जारी किया था। जैसे ही बजट मिला तो पीटीआर के अफसरों ने हाथियों को लाने की प्रक्रिया को शुरू कर दी।

विधानसभा चुनाव निपटने के बाद उन्होंने उनके लाने के लिए वाहनों का एक टेंडर निकाला था, लेकिन टेंडर डालने के बाद ही एमएलसी चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई। जिसको देखते हुए दोबारा से आचार संहिता लागू कर दी गई है। ऐसे में टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि हाथियों को लाने के लिए पांच ट्रक और करीब तीन छोटी गाड़ी चाहिए होंगी। जिसके लिए टेंडर निकाला गया था। मगर, आचार संहिता के चलते पूरा नहीं हो सका है। अब हटने के बाद ही कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।

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