बरेली: ग्लैंडर्स को लेकर जिले में हाई अलर्ट
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश के कई जिलों में घोड़ों, खच्चरों और गधों में जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स के लक्षण पाए गए हैं। इसको देखते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीबीओ) की ओर से जिले में हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया है। तहसील और ब्लाॅक स्तर पर टीम गठन करने के साथ नमूने लेने के आदेश दिए गए …
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश के कई जिलों में घोड़ों, खच्चरों और गधों में जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स के लक्षण पाए गए हैं। इसको देखते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीबीओ) की ओर से जिले में हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया है। तहसील और ब्लाॅक स्तर पर टीम गठन करने के साथ नमूने लेने के आदेश दिए गए हैं। बीमार पशुओं के नमूने लेकर परीक्षण को भेजे जाएंगे।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ललित कुमार वर्मा ने बताया कि घोड़ों, खच्चरों और गधों को ग्लैंडर्स की बीमारी होती है। ग्लैंडर्स का अभी तक कोई इलाज नहीं है। ग्लैंडर्स से के शिकार पशु को मारने के बाद गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया जाता है। इसे फैलने से रोकने का यही एक उपाय है। सीबीओ ने बताया कि जिले में अभियान चलाकर अश्ववंशी पशुओं का रक्त परीक्षण किया जा रहा है। इससे ग्लैंडर्स से संक्रमित पशु की पहचान करके अन्य पशुओं को बचाया जा सके। पशुपालकों को इस बीमारी के लक्षणों और बचाव की जानकारी दी जा रही है।
मुआवजे में मिलते हैं 25 हजार रुपये
सीबीओ डॉ. ललित कुमार वर्मा ने बताया कि सरकार ग्लैंडर्स की चपेट में आए पशु को मारने से पहले उसके मालिकों को 25 हजार रुपये का मुआवजा देती है। इससे पशुपालक की क्षतिपूर्ति हो जाती। यह बीमारी पशुओं से इंसानों में भी फैलने की आशंका रहती है, जिससे सतर्कता बरतने की जरूरत है। इस बीमारी से संक्रमित होने पर शुरुआती दौर में ही उपचार संभव है।
ऐसे फैलता है ग्लैंडर्स
ग्लैंडर्स संक्रामक रोग है। इस बीमारी के बैक्टीरिया कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते हैं। इलाज से भी यह पूरी तरह मरते नहीं हैं। इससे दूसरे पशु और इंसान भी संक्रमित हो जाते हैं। ग्लैंडर्स ऑक्सीजन के जरिए फैलता है। ग्लैंडर्स ग्रसित पशु के शरीर में गांठें पड़ने के साथ खांसी हो जाती है। गांठों में संक्रमण होने के कारण पशु उठ नहीं पाता है। नाक से स्राव निकलता है। आखिर में मौत हो जाती है।
ग्लैंडर्स की रोकथाम के लिए अभियान शुरू चलाया जाएगा। इसके लिए टीमें गठित कर दी गई हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में पशुओं की नियमित जांच करेंगी। ग्लैंडर्स को लेकर पशु चिकित्साधिकारियों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। —ललित कुमार वर्मा, सीबीओ
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