मुरादाबाद : दहेज-दूसरी शादी की इच्छा करा रही तीन तलाक

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। तीन तलाक कानून लागू हुए ढाई साल हो चुके हैं। इसके बाद से तीन तलाक की शिकायतों को ना केवल तत्काल दर्ज किया जा रहा है, बल्कि इनकी त्वरित विवेचना भी होने लगी है। बावजूद इसके महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने वाले इस कानून का कोई ठोस लाभ जिले की महिलाओं को …

मुरादाबाद, अमृत विचार। तीन तलाक कानून लागू हुए ढाई साल हो चुके हैं। इसके बाद से तीन तलाक की शिकायतों को ना केवल तत्काल दर्ज किया जा रहा है, बल्कि इनकी त्वरित विवेचना भी होने लगी है। बावजूद इसके महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने वाले इस कानून का कोई ठोस लाभ जिले की महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। तीन तलाक के मामले अभी भी पहले की ही तरह सामने आ रहे हैं। बस फर्क इतना सा पड़ा है कि पहले मुकदमे दहेज की धाराओं में दर्ज होते थे और अब तीन तलाक अधिनियम की धाराओं में दर्ज हो रहे हैं।

पुलिस से मिले इनपुट के मुताबिक जिले में तीन तलाक की औसतन 12-15 शिकायतें प्रतिदिन आ रही हैं। पुलिस इनमें से आठ से 10 शिकायतों को दर्ज भी कर रही है। वहीं, बाकी शिकायतों का समझौते के माध्यम से निस्तारण कराया जा रहा है। इस तरह के मामलों की विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारियों के मुताबिक तीन तलाक की शिकायतों में कोई कमी नहीं आई है। अभी भी लोग पत्नी के साथ किसी भी तरह का मनमुटाव होने पर बेधड़क इस प्रथा का इस्तेमाल कर संबंध विच्छेद करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इस कानून के बनने के बाद पीड़ित महिलाएं मुखर होकर सामने आने लगी हैं।

पहली पत्नी से पीछा छुड़ाने को प्रथा की ले रहे आड़
पुलिस के पास आ रही तीन तलाक की शिकायतों में दो बातें कॉमन हैं। आमतौर पर पीड़ित महिलाओं का मुख्य आरोप होता है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने की वजह से पति ने तीन बार तलाक बोल कर संबंध विच्छेद किया है। इसके साथ दूसरी शिकायत होती है कि पति किसी अन्य महिला से निकाह को इच्छुक है, इसलिए पहली पत्नी से पीछा छुड़ाने के लिए इस प्रथा की आड़ ले रहा है।

कानून और सामािजक संगठनक मिलकर करें समाधान
मनोवैज्ञानिक डॉ. राजीव कौशिक के मुताबिक महिलाओं को अधिकार दिलाने वाला यह कानून निसंदेह बहुत अच्छा है। लेकिन इस कानून का इस्तेमाल तो घटना के बाद में ही होगा। इसलिए पहले जरूरी है कि ऐसी नौबत ही ना आने दिया जाए। इसके लिए लोगों को सामाजिक बंधन से बांधना होगा। लोगों को खासतौर पर महिलाओं को जागरुक करना होगा कि वह अपने घर में या पास पड़ोस में इस तरह की घटना होने पर मुखर होकर विरोध करें। डॉ. कौशिक के मुताबिक इस तरह की घटनाओं में कहीं ना कहीं घर की बुजुर्ग महिलाओं की भी भूमिका होती है।

त्वरित सुनवाई से जाएगा संदेश
सुप्रीम कोर्ट के वकील राजीव सिन्हा के मुताबिक यह एक सामाजिक अपराध है। इससे महिलाओं का जीवन पूरी तरह बिखर जाता है। ऐसे में महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों में साक्ष्य संकलन और मुकदमों की विवेचना त्वरित होनी चाहिए। इस तरह के मामलों का ट्रायल भी फास्ट ट्रैक कोर्ट में न्यूनतम समय में पूरा होना चाहिए। इससे दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सकेगी। इसका संदेश समाज में जाएगा और लोग इस तरह की हरकत करने से पहले तीन बार सोचेंगे।

सभी थाना प्रभारियों को महिला अपराध के मामलों को तत्काल दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। इन मामलों की विवेचना भरसक महिला पुलिसकर्मियों से कराई जाती है। इससे महिलाएं खुल कर अपनी पीड़ा पुलिस को बता पाती हैं। -बबलू कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

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