बरेली: आईवीआरआई पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादन के क्षेत्र में एक विरासत है: निदेशक
बरेली, अमृत विचार। इज्जतनगर स्थित भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान में रविवार को एक दिवसीय इन्डस्ट्री-अकेडिमिया मीट का आयोजन वचुर्वल माध्यम से किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा हमें भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योगों के साथ मिलकर भविष्य में आने वाली पशुओं …
बरेली, अमृत विचार। इज्जतनगर स्थित भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान में रविवार को एक दिवसीय इन्डस्ट्री-अकेडिमिया मीट का आयोजन वचुर्वल माध्यम से किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा हमें भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योगों के साथ मिलकर भविष्य में आने वाली पशुओं की बीमारियों को दूर करने के लिए टीकों और नैदानिकों का विकास करना होगा।
उन्होंने कहा कि विभिन्न पशु रोगों के संक्रमण से पशु स्वास्थ्य और उत्पादन प्रभावित होता है इसलिए इस क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं। हमारा संस्थान पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादन के क्षेत्र में एक विरासत है जिसने अपने क्षेत्र में 26 पेटेन्ट, 18 डिजाइन और 38 कॉपीराइट प्राप्त किया है। संस्थान के 38 तकनीकों का 138 व्यापारिक घरानों को वाणिज्यीकृत किया गया है। संस्थान के संयुक्त निदेशक (शोध) डा. जी. साई कुमार ने कहा कि हमारा संस्थान पशुओं के संक्रामक रोगों के नियंत्रण उन्मूलन एवं टीका उत्पादन में अग्रणी रहा है।
आईटीएमयू के प्रभारी डा. एस. के. सिंह ने बताया कि 110 से अधिक वैज्ञानिक, उद्यमी तथा राज्य पशुपालन विभाग के प्रतिनिधियों तथा दवा बनाने वाली कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर देश भर के दो दर्जन से अधिक पशुचिकित्सा दवा एवं टीका निर्माता कम्पनियों के अतिरिक्त संस्थान के बंगलरू, कोलकाता, मुक्तेश्वर एवं पुणे परिसरों के प्रतिनिधि वर्चुअल रूप से सम्मिलत हुए। समारोह में उद्घाटन सत्र के बाद टीकों और नैदानिकों पर अलग-अलग तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक, प्रसार शिक्षा डा. हरेन्द्र कुमार, जैविक मानकीकरण उत्पादन विभाग के डा. पी. धर, जैविक उत्पाद विभाग के विभागाध्यक्ष, डा. पल्लव चौधरी, एकेडिमिक कोर्डिनेटर डा. ज्ञानेन्द्र सिंह, डा. मिथलेश कुमार सिंह, डा. सल्लाउद्दीन कुरैशी आदि सम्मिलत हुए। समारोह में अतिथियों का स्वागत डा. पी. धर द्वारा किया गया जबकि कार्यक्रम का संचालन डा. बबलू कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रभारी एटिक डा. रूपसी तिवारी द्वारा दिया गया
