Sri Lanka crisis: राष्ट्रपति ने बेसिल राजपक्षे को वित्त मंत्री के पद से हटाया, चार नए मंत्रियों ने ली शपथ
कोलंबो। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने सोमवार को अपने भाई को वित्तमंत्री के पद से हटा दिया और उनकी जगह चार मंत्रियों को नए विभागों के लिए शपथ दिलाई। इससे पहले सभी मंत्रियों ने देश की आजादी के बाद से सबसे खराब वित्तीय संकट से उबरने के लिए इस्तीफा दे दिया था। राजपक्षे के …
कोलंबो। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने सोमवार को अपने भाई को वित्तमंत्री के पद से हटा दिया और उनकी जगह चार मंत्रियों को नए विभागों के लिए शपथ दिलाई। इससे पहले सभी मंत्रियों ने देश की आजादी के बाद से सबसे खराब वित्तीय संकट से उबरने के लिए इस्तीफा दे दिया था।
राजपक्षे के मीडिया कार्यालय ने 26 कैबिनेट मंत्रियों के सामूहिक रूप से इस्तीफा देने के बाद एक बयान में कहा, “संसद सुनिश्चित करने के लिए चार मंत्रियों की नियुक्ति की गई है और जब तक कि पूर्ण मंत्रिमंडल शपथ नहीं ले लेता अन्य कार्यों को वैध तरीके से संचालित किया जाएगा।” घोषणा में कहा गया है कि न्याय मंत्री अली साबरी नए वित्त मंत्री होंगे, जो बेसिल राजपक्षे की जगह लेंगे, जो इस महीने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ एक आपातकालीन ऋण सुरक्षित करने के लिए वाशिंगटन जाने वाले थे।
पूर्व विदेश मंत्री (जी एल पेइरिस), शिक्षामंत्री (दिनेश गुणवर्धने) और राजमार्गमंत्री (जॉन्सटन फर्नांडो) अपने पद पर बने रहेंगे। अधिकारियों ने कहा कि और अधिक मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। वर्ष 2009 में तमिल टाइगर अलगाववादियों को कुचलने वाले युद्ध की अध्यक्षता करने वाले राजपाक्षे ने सभी दलों से सार्वजनिक विरोध के बीच एक नई सरकार में शामिल होने का आह्वान किया है।
सरकार के खिलाफ सड़क पर विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा और कई शहरों में भीड़ जमा हो गई। सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका के गवर्नर अजित निवार्ड काबराल ने भी सोमवार को इस्तीफा दे दिया। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि सत्तारूढ़ गठबंधन वाले 11 राजनीतिक दलों में से एक के प्रमुख उदय गम्मनपिला ने राष्ट्रपति राजपक्षे के इस कदम को खारिज कर दिया और नए मंत्रिमंडल को ‘नई बोतल में पुरानी शराब’ कहा।
पिविथुरु हेला उरुमाया पार्टी के प्रमुख गम्मनपिला ने ट्विटर पर लिखा, “हमारी मांग आवश्यक सेवाओं को बहाल करने और संसदीय चुनाव कराने के लिए एक सर्वदलीय अंतरिम सरकार बनाने की है। लोगों को अपना अगला नेता तय करना चाहिए, किसी और को नहीं।
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