बाराबंकी: तीसरे दिन हुई मां चंद्रघंटा की आराधना, मां ललिता के मंदिर में उमड़े भक्त
बाराबंकी। मां जगदंबा के आज के तीसरे रूप को भक्तजन चंद्रघंटा के रूप में पूजते हैं। देवी माता का यह स्वरूप परम शांति दायक और कल्याणकारी होता है। जिसको लेकर जनपद के ज्यादातर दुर्गा मंदिरों में होने वाली पूजा के लिए भक्तजन तैयारियों में जुट गए हैं। कुछ ऐसा ही नजारा जनपद की रामनगर तहसील …
बाराबंकी। मां जगदंबा के आज के तीसरे रूप को भक्तजन चंद्रघंटा के रूप में पूजते हैं। देवी माता का यह स्वरूप परम शांति दायक और कल्याणकारी होता है। जिसको लेकर जनपद के ज्यादातर दुर्गा मंदिरों में होने वाली पूजा के लिए भक्तजन तैयारियों में जुट गए हैं।
कुछ ऐसा ही नजारा जनपद की रामनगर तहसील अंतर्गत 150 साल पुराने गणेशपुर के ललिता माता संतोषी देवी मंदिर का है। जहां रेवती नक्षत्र की शुभ मुहूर्त में शुरुआत हुए चैत्र नवरात्र पर बड़ी संख्या में क्षेत्र सहित दूरदराज से आने वाले लोग मा के इस मनमोहक रूप की बड़े विधि-विधान से अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु पूजन अर्चन करते हैं। क्षेत्रीय जन नवरात्रि के नौ दिनों में माता की सुबह और शाम भेंटे गाकर अपनी अर्जी लगाते हैं।
गणेशपुर क्षेत्र के बलराम ताऊ की ‘मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा’ माता की आरती यहां की देर शाम को होने वाली मुख्य पूजा की प्रसिद्ध आरती है। जिसे सुनकर क्षेत्रवासी भाव विभोर हो उठते हैं। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भक्त सच्चे मन से संतोषी माता की पूजा अर्चना कर अपनी अर्जी लगाता है। माता रानी उसकी अर्जी आवश्य पूर्ण करती है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विमल बताते हैं कि तकरीबन 30 वर्ष पहले एक श्रद्धालु ने माता को अपनी जीभ काट कर चढ़ाई थी जिसके कुछ दिनों बाद वह पूरी तरीके से सही होकर बोलने लगा था। जिसके बाद माता रानी की कृपा और दया हम क्षेत्रवासियों पर ऐसी बरसी कि किसी भी भक्त द्वारा लगाई गई अर्जी खाली नहीं गई। और न ही लोगों को माता रानी की इस कठिन परीक्षा से गुजारना पड़ा।
