निजी समूहों से चुनावी चंदे पर प्रतिबंध लगाने वाले अमेरिकी प्रांतों में शामिल हुआ मिसिसिपी
जैक्सन (अमेरिका)। अमेरिका में मिसिसिप्पी अब रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले उन प्रांतों में शामिल हो गया है, जहां चुनावी अभियान के लिए निजी समूहों से चंदा स्वीकार करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कदम 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग द्वारा चंदा दिए जाने के संदेह के मद्देनजर उठाया गया …
जैक्सन (अमेरिका)। अमेरिका में मिसिसिप्पी अब रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले उन प्रांतों में शामिल हो गया है, जहां चुनावी अभियान के लिए निजी समूहों से चंदा स्वीकार करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कदम 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग द्वारा चंदा दिए जाने के संदेह के मद्देनजर उठाया गया है।
मिसिसिपी के गवर्नर टेट रीव्स ने शुक्रवार को ‘हाउस बिल 1365’ पर दस्तखत किए, जो एक जुलाई से कानूनी रूप से प्रभावी हो जाएगा। इसमें कहा गया है कि चुनाव संपन्न कराने वाले प्रांतीय या स्थानीय अधिकारी ‘‘मतदाताओं को जागरूक करने, उन तक पहुंच बनाने या मतदाता पंजीकरण कार्यक्रम’’ के लिए किसी भी निजी समूह से न तो चंदा मांग सकेंगे और न ही उसे स्वीकार कर सकेंगे।
Election integrity matters. I’ve officially signed legislation to BAN billionaires like Zuckerberg from flooding our state with shady election dollars.
They led to arrests right here. They clouded the 2020 election. We will not allow powerful groups to rig things their way. pic.twitter.com/ERLk5eLBD0
— Governor Tate Reeves (@tatereeves) April 4, 2022
फेसबुक पर सोमवार को जारी एक वीडियो में रीव्स ने कहा कि वह 2020 के चुनाव को प्रभावित करने की एक बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी की कोशिशों को लेकर बहुत चिंतित हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ चाहे यह कंजरवेटिव नेताओं की आवाज दबाने या फिर उन सूचनाओं के प्रवाह को रोकने की कोशिश थी, जिनसे वे सहमत नहीं हैं…कैलिफोर्निया के प्रौद्योगिकी जगत के दिग्गज अमेरिकी अवाम पर अपनी विचारधारा थोपने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ेंगे।’’
रीव्स ने कहा, ‘‘हमारे चुनाव मार्क जुकरबर्ग जैसे अरबपतियों पर निर्भर नहीं होने चाहिए, खासतौर पर तब, जब फेसबुक सरीखी कंपनियां अपने मंच पर कंजरवेटिव आवाजों को व्यवस्थित रूप से दबाने की कोशिशों में जुटी हों।’’ रिपब्लिकन के बहुमत वाली मिसिसिप्पी की सीनेट में बिल का अंतिम स्वरूप दो के मुकाबले 49, जबकि प्रतिनिधि सभा में 38 के मुकाबले 78 मतों से पारित हुआ।
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