बाराबंकी: तीन साल में दो बार तालाब की खुदाई, मनरेगा मजदूरों का दो बार हुआ भुगतान
बाराबंकी। दरियाबाद ब्लॉक में भृष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। ब्लॉक अधिकारियों की मिली भगत से फर्जी तरीके से भुगतान का खेल जारी है। डेक्स बेंच कैमरा इंटरलॉकिंग खरीद में हुये खेल के बाद मनरेगा के तहत एक तालाब को तीन साल में दोबारा खुदाई करवाने का मामला प्रकाश में आया है। दरियाबाद ब्लॉक …
बाराबंकी। दरियाबाद ब्लॉक में भृष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। ब्लॉक अधिकारियों की मिली भगत से फर्जी तरीके से भुगतान का खेल जारी है। डेक्स बेंच कैमरा इंटरलॉकिंग खरीद में हुये खेल के बाद मनरेगा के तहत एक तालाब को तीन साल में दोबारा खुदाई करवाने का मामला प्रकाश में आया है।
दरियाबाद ब्लॉक अंतर्गत लालपुर गुमान ग्राम पंचायत में प्रधान ग्राम विकास अधिकारी व ब्लॉक कर्मचारियों ने मिलकर मनरेगा योजना के तहत एक ही आईडी पर लगातार वित्तीय 2018-19 से 2021-2022 तक काम रुक-रुक कर कराए जाने के बावजूद पूर्ण नहीं दर्शाया गया है। तीन वर्ष में एक तालाब की दो बार में खोदाई कराई जा चुकी है।
फिर भी ब्लाक में काम अभी तक फाइनल नहीं दर्शाया गया है। इस तालाब की खुदाई में दो बार में करीब पौने छह लाख रुपये का भुगतान भी हो चुका है। ब्लाक के अफसर काम बड़ा होने की बात कहकर पुरानी आईडी का प्रयोग बता रहे है। लेकिन वह बीच में दो वर्ष काम बंद रहने के सवाल पर चुप्पी साध जाते है।
दरियाबाद के लालपुरगुमान में वित्तीय वर्ष 2018-19 में ककरहा तालाब की खुदाई कराई गई। 3 फरवरी 2019 से 11 मार्च 2019 तक इस तालाब की खुदाई दर्शाई गई। एक माह आठ दिन तक इस तालाब की खुदाई पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए गए। इसके बाद वित्तीय 2019-20 व 2020-21 बीत गया।
इन वर्षों में काम नहीं कराया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में वर्ष 2018-19 की पुरानी आईडी पर ही काम शुरू कराया गया। इस वित्तीय वर्ष में 26 जून से 13 जुलाई 2021 तक तालाब की खुदाई पुरानी आईडी पर कराई गई। इस बार करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च दर्शाए गए। तीन वर्ष के अंदर एक ही तालाब की खुदाई पर करीब पौने छह लाख रुपये खर्च किए गए है।
मनरेगा एपीओ राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि मनरेगा के तहत काम एक वर्ष में पूर्ण हो जाना चाहिए। जलभराव हो जाने पर काम ब्रेक किया जा सकता है। लेकिन बीच में दो वर्ष काम बंद रहा इसकी स्थलीय जांच करानी पड़ेगी। दो साल बाद काम पुरानी आईडी पर ही हुआ है। मामलें की जांच कराई जाएगी।
यह भी होता खेल
गर्मी के मौसम में परिंदों व जानवरों की प्यास मिटाने समेत तमाम जरूरतों की पूर्ति के लिए तालाब में पानी भराने को लेकर सरकारी धन खर्च होता है। इसमें भी खेल होता है। कई पंचायतों में बारिश के बाद धनराशि का भुगतान कर दिया जाता है। तो कई जगह पर तालाब में भरे पानी मार्च व अप्रैल में खाली करा दिया जाता है, फिर गर्मी के मौसम में उसी में पानी भराकर धनराशि निकाली जाती है।
क्या कहते हैं खण्ड विकास अधिकारी
जब इस विषय पर खण्ड विकास अधिकारी शिव बहादुर सिंह भी मीटिंग में होने की बात कर फोन काट दिया ।
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