सीतापुर: पैंतालिस लाख की आबादी और मुट्ठीभर दमकलकर्मियों से कैसे बुझेगी आग? हर साल आग से तबाह हो जाती है करोड़ों की संपत्ति

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सीतापुर। अग्निकांड के मामलों में संवेदनशील माने जाने वाली सीतापुर जिले में गर्मी की शिद्दत और चढ़ते पारे के बीच लू की तेज थपेड़ाें से जिले के लोग डर रहे हैं। डर इस बात का है, कि गर्मियों में अग्निकांडों का दौर शुरू हो गया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अग्निकांडों की घटनाएं …

सीतापुर। अग्निकांड के मामलों में संवेदनशील माने जाने वाली सीतापुर जिले में गर्मी की शिद्दत और चढ़ते पारे के बीच लू की तेज थपेड़ाें से जिले के लोग डर रहे हैं। डर इस बात का है, कि गर्मियों में अग्निकांडों का दौर शुरू हो गया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अग्निकांडों की घटनाएं बढ़ गई हैं। ऐसे में लोगों को खाने कमाने के साथ ही अपनी गृहस्थी व गाढ़ी कमाई को आग से बचाने की बड़ी चुनौतियां हैं।

सबसे अधिक लोग गांजरी इलाके के डरे हुए हैं, क्यों कि गांजरी क्षेत्र में ज्यादातर लोगों के खर-फूस के घर हैं और आग की एक चिंगारी लगते ही पूरे के पूरे गांव राख के ढेर में दब्दील हो जाते हैं। ऐसे में लोगों को दमकल विभाग के साथ ही अपने निजी संसाधनों पर भी आग से निपटने के लिए तैयार रहना होता है। दरअसल अग्निकांडों से बचाने के लिए मुस्तैद किया गया अग्निशमन विभाग अग्निकांड की घटनाओं पर काबू पाने में नाकाफी है।

करीब पैंतालीस लाख की आबादी वाले सीतापुर जिले में अग्निकांडों से बचाने वाले फायर कर्मियों की संख्या मुट्ठीभर हैं। दमकल विभाग में पर्याप्त मैन पॉवर तो दूर नियतन के आधार पर भी इनकी संख्या बेहद कम है। ऐसे में लोगों को गर्मी के मौसम में आग से डरना लाजिमी है। पिछले वर्षो में यदि अग्निकांडों की घटनाओं पर गौर करें तो जिले में इस साल जनवरी से मार्च तक लगभग 36 घटनाएं हुई हैं।

इस साल अब तक 24 लाख से अधिक की संपत्ति राख हो चुकी है। एक मवेशी की भी झुलस कर जान जा चुकी है। यदि इससे पूर्व साल 2021 की बात करें तो उस साल अग्निकांड की 549 घटनाएं हुई हैं। जिसमें दो करोड़ 59 लाख 45 हजार 800 रुपए की सपंत्ति जलकर नष्ट हो गई थी। इस साल एक व्यक्ति अग्निकांड की भेंट चढ़ गया था। साथ ही 15 मवेशियों की भी झुलस कर मौत हो गई थी। यह आंकड़े सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हैं, यदि इससे इतर बात की जाए तो अग्निकांडों की घटनाओं की संख्या व नुकसान बढ़ सकता है।

जिले में यह हैं संसाधन

राजधानी से सटे सीतापुर जिले में आग की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल विभाग के पास मैन पॉवर के साथ ही संसाधनों का भी अभा है। यहां आग बुझाने के बड़े वाहन छह होने चाहिए, लेकिन इनकी संख्या आधी है। जिलेभर में महज तीन बड़े वाहन वाटर टेंडर हैं। छोटे वाहन भी छह के सापेक्ष महज चार ही हैं। इसी तरह हाई प्रेशर पंप छह होने चाहिए, लेकिन पूरे जिले में महज एक ही हाई प्रेशर पंप है। इसी तरह एक टनर वाटर मिस्ट विद हाई प्रेशर पंप छह की जगह महज दो हैं। इसी तरह जिलेमें फोम टेंडर है ही नहीं। वाटर वाउजर, रेस्क्यू टूल्स सेट भी सीतापुर जिले में नहीं हैं।

पूरे जिले में सिर्फ एक अग्निशमन अधिकारी

सीतापुर जिले में पांच स्थायी व दो अस्थाई फायर स्टेशन हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो हर फायर स्टेशन पर एक अग्निशन अधिकारी होना चाहिए, लेकिन जिले में छह के सापेक्ष महज एक अग्निशमन अधिकारी ही तैनात है। यहां पांच पद रिक्त हैं। हालांकि जिले में मुख्य अग्निशनम अधिकारी तैनात हैं। यदि अन्य पदों के कर्मचारी भी कम हैं। जिले में अग्निशमन द्वितीय अधिकारी भी सात की जगह महज एक की तैनाती है। दो लीडिंग फायर मैन, छह फायर सर्विस चालक, साठ फायर मैन की भी कमी है। कुक व सफाई कर्मियों की भी विभाग के पास भारी कमी है।

जिले में पर्याप्त संसाधन नहीं है, लेकिन उपलब्ध संसाधनों व मैन पॉवर के जरिए बेहतर काम करने की कोशिश रहती है। जिले की सभी तहसीलों पर फायर टीमें मौजूद हैं। इसके अलावा रेउसा इलाके में भी एक वाहन उपलब्ध कराया जा रहा है।

रामबाबू, द्वितीय अग्निशमन अधिकारी।

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