हरदोई: यूपी बोर्ड पेपर लीक मामले में निलंबित भ्रष्टाचारी डीआईओएस ब्रजेश मिश्रा ने हरदोई में कराई थीं फर्जी नियुक्तियां

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हरदोई। भ्रष्टाचार के आरोपो व पेपर लीक मामले में निलंबित डीआईओएस ब्रजेश मिश्रा अब सलाखों के पीछे है लेकिन इस नटवर लाल के भ्रष्टाचार से जिला हरदोई अछूता नही रहा है। आपको बताते चले कि जब ब्रजेश मिश्रा जिला हरदोई का जब बेसिक शिक्षा अधिकारी था तब पता नही कितने ही अपात्र लोगो को जिला …

हरदोई। भ्रष्टाचार के आरोपो व पेपर लीक मामले में निलंबित डीआईओएस ब्रजेश मिश्रा अब सलाखों के पीछे है लेकिन इस नटवर लाल के भ्रष्टाचार से जिला हरदोई अछूता नही रहा है। आपको बताते चले कि जब ब्रजेश मिश्रा जिला हरदोई का जब बेसिक शिक्षा अधिकारी था तब पता नही कितने ही अपात्र लोगो को जिला हरदोई में फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्तियां करा दी थी जिसमे से तीन नियुक्तियां प्रकाश में आई है पिहानी ब्लाक में फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर सहायक अध्यापक निधि शुक्ला, श्वेता ठाकुर व सहायक अध्यापक प्रदीप त्रिपाठी फर्जी तरीके से नौकरी आज भी कर रहे है।

शिकायतकर्ता अतुल सिंह वर्ष 2021 से लगातार इस प्रकरण की शिकायत कर रहा है लेकिन शिक्षा विभाग जांच का खेल खेल रहा है अभी तक इन लोगो की बर्खास्तगी नही हुई है। शिकायतकर्ता ने एसआईटी टीम को गठित कर इन लोगो के गिरोह की जांच की जाए की मांग की है। शिकायतकर्ता अतुल सिंह के कथनानुसार स्वेता ठाकुर व निधि शुक्ला पूर्ण रूप से स्वस्थ है इस बात के सबूत उसके पास मौजूद है व प्रदीप त्रिपाठी शिक्षा विभाग में नौकरी करने से पूर्व में होमगार्ड की नौकरी कर चुका है जो सिद्ध करता है कि प्रदीप त्रिपाठी भी विकलांग नही है।

यह तीनों शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे है जब इन फर्जी शिक्षक लोगो की नियुक्तिया हुई थी तब तत्कालीन खण्ड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार बोस की वर्ष 2015 की जांच आख्या यह दर्शाती है कि उन्होंने इन तीनो फर्जी नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई थी लेकिन तत्कालीन बीएसए ब्रजेश मिश्रा के व राजनीतिक दबाव के चलते मनोज कुमार बोस को अपने आप को सरेंडर करना पड़ा था।

हालांकि शिकायत के बाद तीनों अध्यापकों को विकलांगता की जांच भौतिक रूप से कराने के निर्देश दिए गए थे।लेकिन निर्धारित तिथि बीतने के बाद भी सीएमओ हरदोई को विकलांगता परीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई थी। जिससे नाराज वर्तमान समय के बीएसए वी.पी. सिंह ने पत्र जारी कर पिहानी ब्लाक के उक्त तीनों अध्यापकों के वेतन रोकने का निर्देश दिया था।

आपको बताते चले कि जब वर्ष 2015 में ही यह तीनों नियुक्तियां संदेह के घेरे में आ गई थी उसके बाबजूद भी यह फर्जी शिक्षक आज भी नौकरी कर रहे है जो पूरे सिस्टम पर एक जोरदार तमाचा है।इस पूरे गिरोह की जड़े लखनऊ के स्वास्थ्य विभाग में तक जमी हुई है जिस कारण निधि शुक्ला ने अपनी जांच करा ली है और रिपोर्ट हरदोई के शिक्षा विभाग में प्रेषित कर दी है।

पूर्व में निधि शुक्ला का पति शिकायतकर्ता को धमकी दे चुका है और सार्वजनिक रूप से बोल चुका है कि हरदोई से लेकर लखनऊ तक सेटिंग है जिस कारण ही शायद निधि शुक्ला ने विकलांगता की अपनी जांच रिपोर्ट विभाग को सौप दी है सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग ढाई लाख रुपये खर्च करने के उपरांत फर्जी जांच रिपोर्ट बन पाई है।

इसी पर आपत्ति जताते हुए शिकायतकर्ता अतुल सिंह ने दिनांक छह अप्रैल 2021 को पुनःउच्च स्तरीय शिकायती पत्र प्रेषित किया है व एसआईटी टीम गठित कर पूरे गिरोह की जांच कर फर्जी अध्यापकों की बर्खास्तगी व संलिप्त व्यक्तियों पर कार्यवाही की मांग की है। आपको बताते चले कि हमने अपनी पड़ताल में पाया है कि ऐसे बहुत से शिक्षक नेता है जिनके परिवार के लोग रिश्तेदार फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे है।

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