रामपुर: घरेलू विवाद में दो बहनों ने खाया जहर, एक की मौत

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रामपुर, अमृत विचार। सीआरपीएफ के जवान की बीमारी से पांच साल पहले मौत हो चुकी है। पिछले साल पत्नी की हादसे में जान जा चुकी है। उसकी चार बेटियां थीं, एक की शादी हो गई है, तीन बेटियां एक साथ रहती हैं। मंगलवार की शाम दो छोटी बेटियों में खाना खाने को लेकर विवाद हो …

रामपुर, अमृत विचार। सीआरपीएफ के जवान की बीमारी से पांच साल पहले मौत हो चुकी है। पिछले साल पत्नी की हादसे में जान जा चुकी है। उसकी चार बेटियां थीं, एक की शादी हो गई है, तीन बेटियां एक साथ रहती हैं। मंगलवार की शाम दो छोटी बेटियों में खाना खाने को लेकर विवाद हो गया। गुस्से में दोनों ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर रिश्तेदारों ने मुरादाबाद के जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां एक लड़की की मौत हो गई। दूसरी की हालत गंभीर है उसका उपचार चल रहा है। बहन की मौत होने से अन्य बहनों में कोहराम मचा हुआ है।

ज्वाला नगर के पास आगापुर स्थित लक्ष्मीनगर कालोनी निवासी सीआरपीएफ जवान हरिओम की पांच साल पहले मौत हो गई थी। उसकी पत्नी गंगा रानी को उसकी जगह नौकरी मिली थी कि हादसे में गंगा की भी पिछले साल मौत हो गई। हरिओम की चारों बेटियां अनाथ हो गईं। नानी ने साथ दिया और आकर रहने लगीं। चारों बहनों में सबसे बड़ी ज्योति (20 साल), छाया ( 18 साल), प्रीति (15 साल) और चांदनी (12 साल) की हैं। दूसरे नंबर की छाया ने कोर्ट मैरिज कर ली है और अपने पति के साथ रहती है।

ज्योति की शादी पसियापुरा से तय हो चुकी है। दो छोटी बहनें प्रीति और चांदनी में मंगलवार को शाम खाना खाने को लेकर विवाद हो गया। इसी के चलते दोनों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ती देख तयशुदा ज्योति के ससुराल वाले उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर होने पर मुरादाबाद रेफर कर दिया। मुरादाबाद में प्रीति की मौत हो गई। चांदनी की हालत गंभीर है। प्रीति की मौत के बाद ससुराल वाले अस्पताल में शव छोड़कर भाग गए। बच्चों की नानी ने अपने बेटे को चंदौसी फोन करके मौके पर भेजा और ज्योति के मौसा सुदेश को प्रीति के शव के पास भेजा। पोस्टमार्टम के बाद रिश्तेदार किशोरी का शव रामपुर लेकर पहुंचे तो नानी और बहनें बिलख उठीं।

प्रीति और चांदनी का आपस में झगड़ा हो गया था। उसके बाद दोनों ने गेहूं में रखने वाली गोलियां खा ली थीं। हालत गंभीर होने पर दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां जानकारी मिली है कि एक की मौत हो गई है। – प्रशांत कुमार, ज्वालानगर चौकी इंचार्ज  

पांच साल में बर्बादी के कगार पर परिवार

ईश्वर किसी के साथ ऐसा न करे जो इन चार बच्चियों के साथ हुआ। पहले पिता का साया उठ गया। एक साल पहले मां हादसे में चल बसीं। चारों बहनें अनाथ हो गईं तो रिश्तेदारों ने मदद से उनकी देखभाल शुरू की। अब एक बेटी की जान चली गई। घर में कोई कमाने वाला सदस्य नहीं बचा। इस तरह पांच साल पहले हंसी खुशी रहने वाला परिवार बर्बादी के कगार पर आकर खड़ा हो गया है। बाकी तीनों बहनें माता पिता की मौत के बाद जैसे-तैसे घर का खर्चा चला रही हैं। नानी मदद करती हैं।

घर से बाहर गई थी बहन लौटी तो बेसुध मिलीं बहनें

मृतक प्रीति की बहन ज्योति ने बताया कि शाम के समय वह घर का सामान लेने के लिए बाजार आ गई थी। जबकि उसकी दोनों बहनें घर पर अकेली थीं। दोनों में खाना खाने को लेकर विवाद हो गया था। जिसके बाद दोनों ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। जब वो बाजार से आई तब दोनों बहनें बेसुध मिलीं। फिर उपचार के लिए लेकर गए तो प्रीति की मौत हो गई।

पारा बढ़ने पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस बढ़ जाता है जिससे चिड़चिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा करना, भूख न लगना, सिर भारी रहना, सिर के दर्द की परेशानी जैसी समस्यायें बढ़ जाती है। गुस्सा अधिक होने की समस्या बढ़ना। रोजाना झगड़ा करना। घर पर भी छोटी बातों पर चिल्लाना, सामान फेंक देने की परेशानी होने लगती है। ऐसे में आवेश की अधिकता के चलते आत्महत्या की संभावना भी बढ़ जाती है।-डा.कुलदीप चौहान, मनोचिकित्सक

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