पीलीभीत: जंगल से सटे छह गांव होंगे विकसित, ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार

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पीलीभीत, अमृत विचार। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे छह कॉरिडोर विलेज जल्द ही आत्मनिर्भर बन सकेंगे। विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सहयोग से इन गांवों के कायाकल्प की कार्ययोजना तैयार कर ली है। डीडी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की अनुमति मिलते ही कार्य योजना पर काम शुरू कराया जाएगा। जनपद …

पीलीभीत, अमृत विचार। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे छह कॉरिडोर विलेज जल्द ही आत्मनिर्भर बन सकेंगे। विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सहयोग से इन गांवों के कायाकल्प की कार्ययोजना तैयार कर ली है। डीडी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की अनुमति मिलते ही कार्य योजना पर काम शुरू कराया जाएगा।

जनपद में 272 गांव ऐसे हैं, जो पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बनने से पूर्व इन गांवों के अधिकांश ग्रामीण जंगलों पर ही निर्भर रहते थे। जंगल से जलौनी लकड़ी लाने से लेकर घासफूस कटाई कर जीविकोपार्जन करते आ रहे थे। जून 2014 में जनपद के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद इंसानों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। इससे जंगल से सटे गांवों के ग्रामीणों का रोजगार भी छिन गया।

हालांकि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ द्वारा पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सहयोग से जंगल से सटे गांवों के ग्रामीणों को जंगल से जलौनी लकड़ी लाने पर आश्रित न होना पड़े, इसको लेकर उज्जवला योजना के तहत रसोई गैस सिलेंडर और चूल्हे मुहैया कराए गए। महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। वहीं इन गांवों के कुछ ग्रामीण मशरूम उत्पादन कर जीविकोपार्जन कर रहे हैं।

हालांकि इन गांवों को जिस तरह का विकास और रोजगार देने के दावे किए गए थे, उस स्तर पर इन गांवों को मदद नहीं मिल सकी। इधर, अब जंगल से सटे गांवों के विकास और ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के लिए इको विकास समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य गांवों की समस्याओं का दूर कर विकास और रोजगार आदि मुहैया करना है।

कार्ययोजना के अनुसार रोजगार को दी जाएगी प्राथमिकता
पीटीआर से सटे गांवों में नाली, सड़कें समेत अन्य विकास कार्य पंचायत विभाग द्वारा कराए जा चुके हैं। इन गांवों के ग्रामीणों की जंगल पर निर्भरता कम हो सके और उन्हें रोजगार मिल सके, इसको लेकर छह गांवों को कॉरिडोर विलेज के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ द्वारा लग्गा भग्गा कॉरिडोर क्षेत्र के पुरैना ताल्लुके महाराजपुर, सेल्हा, महाराजपुर, मठइया लालपुर समेत छह गांवों का सर्वे भी किया जा चुका है। सर्वे में गांव में विकास की स्थिति, रोजगार के साधन आदि की जानकारी ली गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने पीटीआर के सहयोग से कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। अब डीडी की अध्यक्षता मे गठित कमेटी की अनुमति मिलने के बाद कार्ययोजना के अनुसार गांवों में विकास और रोजगार मुहैया कराया जाएगा।

जंगल सीमा से सटे गांवों में इको विकास समितियों के माध्यम से विकास और ग्रामीणों के जीवनस्तर में वृद्धि के लिए उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाएगा। इसको लेकर छह गांवों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। पीटीआर के सहयोग से कार्ययोजना भी तैयार की जा चुकी है। कार्य योजना पर अनुमति मिलते ही कार्य शुरू कराया जाएगा। – नरेश कुमार, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी, विश्व प्रकृति निधि

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