मुरादाबाद : ट्रेनों में फिर से बढ़ने लगे अवैध वेंडर, नहीं होती कार्रवाई
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना के बाद एक बार फिर ट्रेनों में अवैध वेंडर सक्रिय हो गए हैं। ट्रेन आते ही अवैध वेंडर टूट पड़ते हैं। कोरोना काल में इनका संख्या कम हो गई थी। रेल मंडल में एक हजार से ज्यादा अवैध वेंडर हैं। आरपीएफ अवैध वेंडरों की धर पकड़ तो करती है, लेकिन सब …
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना के बाद एक बार फिर ट्रेनों में अवैध वेंडर सक्रिय हो गए हैं। ट्रेन आते ही अवैध वेंडर टूट पड़ते हैं। कोरोना काल में इनका संख्या कम हो गई थी। रेल मंडल में एक हजार से ज्यादा अवैध वेंडर हैं। आरपीएफ अवैध वेंडरों की धर पकड़ तो करती है, लेकिन सब कागजी होता है। आरपीएफ से मिली छूट का ही नतीजा है कि स्टेशनों अवैध वेंडरों का ही राज चलता है। बेखौफ वेंडर घटिया माल बेचते हैं। इतना ही नहीं मनमाने तरीके से बिक्री करने के साथ यात्रियों से बदसलूकी भी करते हैं। अपनी मर्जी से किसी भी ट्रेन में चढ़ जाते हैं।
यात्रियों से लेते है दोगुना पैसे
ज्यादातर लंबी दूरी की गाड़ियों में यात्रियों को 30-40 घंटे का सफर करना पड़ता है। यात्री घर से जो कुछ लेकर चलते हैं। सब कुछ खत्म हो जाता है तो बाहर से खरीदने के लिए मजबूर होते हैं, जिसका फायदा अवैध वेंडर उठाते हैं। सामान को दोगुने से ज्यादा दाम पर बेचते हैं। लोकल में तैयार की गई पानी की बोतल वेंडर चार से पांच रुपये की दर से खरीदते हैं और उसे ट्रेनों में 20 रुपये तक बेचा जाता है। एक बोतल पर सीधे 15 रुपये तक की बचत होती है। जबकि ब्रेड पकौड़ा में केवल दो ब्रेड के टुकड़ों को मैदा लगाकर तला जाता है। इसमें अधिकतम दो से ढाई रुपये की लागत आती है और 10-20 रुपये में बेचा जाता है। घटिया दूध की चाय बेची जाती है।
लाइनपार से होता है संचालन
सूत्रों की मानें तो अवैध वेंडरों का संचालन लाइनपार की ओर से होता है। ट्रेनों में अवैध रूप से सामान बेचने वाले वेंडर ज्यादातर लाइनपार की ओर से ही आते हैं। खाने-पीने का सामान भी वहीं से बनकर आता है। प्लेटफार्म एक को छोड़कर दो से पांच पर आने वाली ट्रेनों में यह सामान बेचते हैं। अगर, इन पर कार्रवाई होती है तो वह लाइनपार की ओर भाग जाते हैं। ऐसा कई बार हुआ कि आरपीएफ के अभियान चलने से पहले ही अवैध वेंडर लाइनपार की ओर फरार हो जाते हैं।
स्टेशन पर पूरी तरह से अवैध वेंडरों के लिए रोक है। अवैध वेंडरों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। जल्द मंडल में अवैध वेंडरों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। अभियान में अवैध वेंडरों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -सुधीर सिंह, सीनियर डीसीएम
अवैध वेंडर भी पहनते हैं यूनिफॉर्म
स्टेशन पर सक्रिय अवैध वेंडर भी रेलवे के वेंडरों की तरह यूनिफॉर्म पहनकर आते हैं। स्टेशन पर घूमते हुए दिखाई देने पर उनकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है। जबकि इनके पास यूनिफॉर्म पहनने के साथ स्टेशन पर बिक्री के लिए बनने वाला मेडिकल भी नहीं होता, जिसके चलते लोग इनकी पहचान नहीं हो पाती है।
