बरेली: निरीक्षण करने के बाद भेजनी होगी सेल्फी
बरेली, अमृत विचार। महिला एवं बाल विकास पोषाहार विभाग में बढ़ती अव्यवस्थाओं को देखते नई व्यवस्था लागू की गई है। कर्मचारी और अधिकारियों की मनमानी के चलते पोषाहार वितरण नहीं हो पा रहा है। व्यवस्थाओं को दुरुस्त किये जाने के लिए डीपीओ ने निरीक्षण किये जाने के बाद आंगनबाड़ी केंद्र पर ही सेल्फी खींचकर भेजने …
बरेली, अमृत विचार। महिला एवं बाल विकास पोषाहार विभाग में बढ़ती अव्यवस्थाओं को देखते नई व्यवस्था लागू की गई है। कर्मचारी और अधिकारियों की मनमानी के चलते पोषाहार वितरण नहीं हो पा रहा है। व्यवस्थाओं को दुरुस्त किये जाने के लिए डीपीओ ने निरीक्षण किये जाने के बाद आंगनबाड़ी केंद्र पर ही सेल्फी खींचकर भेजने के निर्देश दिये हैं।
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 2857 है। इनमें तीन लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। यहां पर 2300 बच्चे अति कुपोषित और 23 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनकी सेहत सुधारने के लिए शासन की ओर से सूखे राशन की व्यवस्था की गई है। सरकार की इस मंशा पर जिम्मेदार पलीता लगाने का काम कर रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते कुपोषित बच्चों तक पोषाहार नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी मुख्य वजह ये है कि जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कभी भी आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण नहीं किया जाता है, जिस वजह से इनमें मनमानी हावी है। अधिकतर केंद्र बंद रहते हैं और बच्चों को बांटे जाने के लिए आने वाला पोषाहार कहां जाता है, इसका कोई पता नहीं होता है।
वहीं शासन की ओर से लाखों रुपये पानी की तरह खर्च कर आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति दुरुस्त किये जा रहे हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी दीनानाथ द्विवेदी ने व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए सीडीपीओ को प्रत्येक सप्ताह आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किये जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सख्त निर्देश दिये हैं कि निरीक्षण करते समय अधिकारी आंगनबाड़ी केंद्र पर सेल्फी खींचकर भेजें और वहां पर क्या-क्या खामियां पाई गईं, इसका भी ब्योरा देना होगा। ऐसा न करने वाले अधिकारी के खिलाफ भी लिखा जाएगा और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
राशन की मात्रा है कम
गर्भवती, धात्री और किशोरियों की सेहत के साथ भी सूखे राशन के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। शासन के निर्देशों के मुताबिक गर्भवती, किशोरी और धात्री महिलाओं को प्रति माह दो किलो गेहूं, 1.5 किलो ग्राम चावल दिए जाने का प्रावधान है। इसी तरह 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को 1.5 किलोग्राम गेहूं और एक किलो चावल मुहैया कराए जाने की व्यवस्था की गई है। वहीं, अति कुपोषित बच्चों को 2.5 किलोग्राम गेहूं, 1.5 किलोग्राम चावल के अलावा 900 ग्राम घी भी देने का प्रावधान है, लेकिन कम पोषाहार आने की वजह से विभाग खुद कुपोषित होता नजर आ रहा है।
कई आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषाहार न बंटने और अधिकारियों की ओर से निरीक्षण न किये जाने की शिकायत मिल रही थी। सभी सीडीपीओ को निर्देश दिये गये हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्र में निरीक्षण कर सेल्फी भेजें। —दीनानाथ द्विवेदी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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