मुरादाबाद : स्कूलों में 70 प्रतिशत की धांधली का कोर्स, अभिभावक परेशान

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। निजी स्कूल विक्रेता और प्रकाशकों से मिलकर अभिभावकों की जेब काटने में जुट गए हैं। क्योंकि अब स्कूलों में 70 प्रतिशत धांधली का कोर्स चल रहा है। निजी प्रकाशकों की किताबों पर विक्रेताओं द्वारा स्कूल प्रबंधन को 30 से 70 प्रतिशत का कमीशन दिया जा रहा है। जिससे अभिभावक परेशान हैं, जबकि विभागीय …

मुरादाबाद,अमृत विचार। निजी स्कूल विक्रेता और प्रकाशकों से मिलकर अभिभावकों की जेब काटने में जुट गए हैं। क्योंकि अब स्कूलों में 70 प्रतिशत धांधली का कोर्स चल रहा है। निजी प्रकाशकों की किताबों पर विक्रेताओं द्वारा स्कूल प्रबंधन को 30 से 70 प्रतिशत का कमीशन दिया जा रहा है। जिससे अभिभावक परेशान हैं, जबकि विभागीय जिम्मेदार मौन बैठे हैं। हर साल नए सत्र में प्रकाशकों के साथ मिलकर स्कूल प्रबंधन इस कारोबार में जुट जाता है। कोई किताब का कवर बदल देता है तो कोई एक ही दुकान से किताब खरीदने के लिए बाध्य करता है।

सूत्र कहते हैं कि दुकानदार स्कूल प्रबंधन को कमीशन का लालच देते हैं। लालची कारोबारी बच्चों की शिक्षा और अभिभावकों की समस्या भूल अपनी कमाई में जुट जाते हैं। जबकि एनसीआरटी की किताबें निजी प्रकाशन से सस्ती होती हैं। लेकिन कुछ स्कूल प्रबंधन कमीशन के चक्कर में अधिकांश किताबें निजी प्रकाशक की लगा रह हैं। अगर यह कमीशन का खेल बंद हो जाए तो बच्चों को 100 रुपये वाली किताब 30 रुपये तक की मिल सकेगी।

मौजूदा समय में स्कूल प्रबंधन भी चतुर हो गए है। अब स्कूल कि किताबों की लिस्ट में दुकान नाम नहीं लिख रहा है, जिससे कोई लिखित प्रमाण न रहे। ऐसे में अभिभावकों को एक दुकान पर जाने के लिए स्कूल प्रबंधन मौखिक कह रहे हैं। हालांकि, शिरडी साईं स्कूल, पीएमएस, डीपीएस व अन्य स्कूलों में भी पहली कक्षा का कोर्स 3000 से अधिक है। जो केवल इंडियन बुक हाउस पर ही मिल रहा है। सोमवार को अमृत विचार की टीम ने जब किताब विक्रेताओं से फोन से पड़ताल की तब उन्होंने 70 प्रतिशत कमीशन की बात की। उन्होंने कहा फिलहाल किताबों की कमी है, जिससे पूरा करने में समय लगेगा। लेकिन, किताब हमसे ली तो 70 प्रतिशत तक अपको कमीशन देंगे।

इंडिया बुक हाउस के किताब विक्रेता नासिर से स्कूल में किताब लगवाने की बात कही तो उन्होंने किताबों की कम होने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रकाशक से पाठ्यक्रम पूरा कर दिया जाएगा। प्रकाशक कोई भी बस कवर बदलता है और पाठ्यक्रम सामान्य होता है। कहा कि हम दो तरह की छूट देते हैं। एक तो तीन माह के लिए उधर किताबें देते हैं। वहीं दूसरा तरफ कैश किताबें उठाने पर 70 प्रतिश की छूट होगी। रिटन पालिसी में 30 हजार पर 80 प्रतिशत लेंगे और 20 प्रतिशत छोड़ देंगे। एशिया बुक हाउस के स्वामी संतोष ने कहा कि हम छोटे प्रकाशक की किताब नहीं बेचते हैं। हम पर महंगे प्रकाशक की किताबें मिलती हैं। किताब के अनुसार 20 से 50 प्रतिशत तक की छूट मिल जाएगी। उन्होंने कि अगर स्कूल अपना कमीशन छोड़ेगे, तो हम बच्चों को छूट दे सकते हैं।

सरकार को हर साल कोर्स में बदलाव न होने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। सभी स्कूलों में प्रत्येक कक्षा के लिए एनसीआरटी किताबें लागू की जानी चाहिए। जिससे स्कूल में हर साल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं होगा। इससे स्कूलों की चोर बाजारी पर अंकुश लगेगा और अभिभावकों की जेब पर असर नहीं पड़ेगा। -अनुज गुप्ता, संयोजक, मुरादाबाद पेरेंट़्स आफ आल स्कूल

कोई भी स्कूल अभिभावकों को मनचाहे दुकान से किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं। अगर किताबों में कमीशन खाने की शिकायत आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। जिला नियामक समिति में मुद्दे को रखा जाएगा। फिलहाल किसी भी अिभभावक की ओर से शिकायत नहीं मिली है। -डा.अरुण कुमार दुबे, जिला विद्यालय निरीक्षक

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