लखनऊ: भारत में प्रशिक्षित चिकित्सकों की भारी कमी ,35 फीसदी मरीजों को समय पर नहीं मिल पाता है इलाज
लखनऊ। एसजीपीजीआई के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग द्वारा एफसीसीएस प्रोवाइडर एंड इंस्ट्रक्टर कोर्स के 7वें संस्करण के दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरूआत आज यानी शनिवार से हो गयी । पीजीआई में शुरू हुये इस दो दिवसीय कोर्स का शुभारम्भ एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आर के धीमान ने दीप प्रज्जवलित कर के की। इस कार्यशाला का समापन रविवार …
लखनऊ। एसजीपीजीआई के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग द्वारा एफसीसीएस प्रोवाइडर एंड इंस्ट्रक्टर कोर्स के 7वें संस्करण के दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरूआत आज यानी शनिवार से हो गयी । पीजीआई में शुरू हुये इस दो दिवसीय कोर्स का शुभारम्भ एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आर के धीमान ने दीप प्रज्जवलित कर के की। इस कार्यशाला का समापन रविवार को होगा।
इस कोर्स के जरिए चिकित्सकों, प्रशिक्षु चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को गंभीर रूप से बीमार अथवा घायल मरीजों की प्रारंभिक देखभाल के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण सिद्धांतों की जानकारी देना है, जिससे वे गंभीर रूप से बीमार ऐसे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सक के आने तक उनकी देखभाल कर सकें।
इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित पीएसआरआई अस्पताल के डॉ. सिमंत कुमार झा ने बताया कि भारत में प्रशिक्षित चिकित्सकों की भारी कमी है,इसी के चलते आज भी करीब 35 फीसदी मरीजों को समय रहते इलाज नहीं मिल पाता है,यदि चिकित्सक प्रशिक्षित होंगे,तो समय रहते मरीज की सही स्थित की पहचान हो सकेगी और उनकी जान बच सकेगी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में जितने नये डाक्टर हैं,उनकी तैनात दूर-दराज के क्षेत्रों में या फिर इमरजेंसी में होती है,यदि चिकित्सक दूरदराज के क्षेत्र में है,तो इस कोर्स को करने के बाद गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज दे सकता है,साथ ही यदि मरीज को वहां पर इलाज देना संभव नहीं होगा,तो बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर सकता है।
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