मुरादाबाद : खुशखबरी! अब एक माह में हेड कांस्टेबल बनेंगे दरोगा
मुरादाबाद,अमृत विचार। हेड कांस्टेबल से दरोगा बनने का सपना पाले पुलिस कर्मियों के लिए खुशखबरी है। हेड कांस्टेबल महज एक माह बाद ही कंधे पर स्टार लगाने के पात्र होंगे। शासन ने दरोगा बनने की पूर्व निर्धारित प्रशिक्षण अवधि 60 दिन को कम कर के 30 दिन करने का फैसला किया है। डा. भीमराव आंबेडकर …
मुरादाबाद,अमृत विचार। हेड कांस्टेबल से दरोगा बनने का सपना पाले पुलिस कर्मियों के लिए खुशखबरी है। हेड कांस्टेबल महज एक माह बाद ही कंधे पर स्टार लगाने के पात्र होंगे। शासन ने दरोगा बनने की पूर्व निर्धारित प्रशिक्षण अवधि 60 दिन को कम कर के 30 दिन करने का फैसला किया है। डा. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी के एडीजी जेएन सिंह संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजने की तैयारी में जुटे हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल से दरोगा बनने के लिए दो महीने का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य था। इस अवधि में प्रशिक्षु कांस्टेबल आउट डोर व इनडोर का प्रशिक्षण प्राप्त करते थे। 15 मार्च से मुरादाबाद की पीटीसी में 604 व पीटीएस में 200 हेड कांस्टेबल ने दरोगा बनने की ट्रेनिंग शुरू की। इनमें से तीन हेड कांस्टेबल की मौत प्रशिक्षण के दौरान हो गई। डेढ़ माह में तीन पुलिस कर्मियों की मौत ने शासन को झकझोर दिया।
जांच में पता चला कि प्रशिक्षु हेड कांस्टेबल में 420 पुलिस कर्मी ऐसे हैं, जिनकी उम्र 50 से 55 वर्ष के बीच है। जबकि 56 से 57 वर्ष के बीच 119 हेड कांस्टेबल मिले। 63 हेड कांस्टेबल ऐसे पाए गए, जिनकी उम्र 58 से 60 के बीच है। उच्चाधिकारियों को समझते देर नहीं लगी कि नौकरी के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे हेड कांस्टेबल शारीरिक रूप से कमजोर हो चले हैं। ऐसे में आउटडोर की कठिन ट्रेनिंग उम्रदराज हेड कांस्टेबल पर भारी पड़ रही है। उच्चाधिकारियों ने जांच में मिले तथ्यों से शासन को अवगत कराया। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने हेड कांस्टेबल से दारोगा बनने की तय प्रशिक्षण अवधि दो माह को घटा कर अब एक माह करने का निर्णय लिया है।
विवेचना व साइबर क्राइम पर बल
हेड कांस्टेबल से दरोगा बनने वाले पुलिस कर्मियों को मुकदमे की विवेचना करने का गुर बताया जाएगा। डा. भीमराव आंबेडकर पुिलस अकादमी के एडीजी जेएन सिंह ने बताया कि एक दारोगा का मुख्य कार्य मुकदमे की विवेचना करना होता है। फील्ड पुिलसिंग के तौर तरीके से एक हेड कांस्टेबल पहले से वाकिफ होता है। ऐसे में पूर्व के पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए गैर जरूरी विषय को हटा देने की योजना है। आइपीसी व सीआरपीसी की जानकारी देने की बजाय हेड कांस्टेबल साइबर क्राइम, मानवाधिकार, महिला उत्पीड़न के मुकदमे में पुलिस की कार्रवाई से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा आउट डोर ट्रेनिंग में कठिन शारीरिक अभ्यास की बजाय योगा व मेडिटेशन पर ध्यान केंद्रित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
हर्ट अटैक से हुई दो हेड कांस्टेबल की मौत
पुलिस ट्रेनिंग कालेज में प्रशिक्षणरत हेड कांस्टेबल सौदान सिंह हाथरस के रहने वाले थे। 30 मार्च को पीटीसी के टायलेट में उनका शव मिला। जबकि एटा के रहने वाले हेड कांस्टेबल राधेश्याम ने उपचार के दौरान 18 मार्च को दम तोड़ दिया। दोनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि मौत की वजह हर्ट अटैक है। कुछ ऐसी ही घटनाएं पीटीएस मुरादाबाद व जालौन में हुईं। वहां प्रशिक्षणरत दो हेड कांस्टेबल की मौत हो गई। इसके बाद ही शासन ने हेड कांस्टेबल से दारोगा बनने के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में बदलाव करने का फैसला किया।
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