मुंह के कैंसर के प्रति जागरूकता ही जीवन बचाने का एकमात्र तरीका : प्रो. शैली महाजन
लखनऊ। दुनिया भर में 70 से 80 प्रतिशत लोग डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब मुंह का कैंसर एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका होता है, जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है। ऐसे में कैंसर से जान बचाने के लिए जन जागरूकता ही एकमात्र रास्ता तथा आशा की एक …
लखनऊ। दुनिया भर में 70 से 80 प्रतिशत लोग डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब मुंह का कैंसर एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका होता है, जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है। ऐसे में कैंसर से जान बचाने के लिए जन जागरूकता ही एकमात्र रास्ता तथा आशा की एक किरण है, यह कहना है डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के दंत चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर डॉ. शैली महाजन का।

डॉ. महाजन ने पहल करते हुए फैकल्टी डॉ. ज्योति जैन, डॉ. पद्मनिधि अग्रवाल, सीनियर रेजिडेंट डॉ. दिव्या, जूनियर रेजिडेंट्स और दंत चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर एक जन जागरूकता अभियान की शुरूआत की, यह अभियान पूरे एक महीने तक चलाया गया। लोहिया संस्थान के दंत चिकित्सा विभाग ने अप्रैल के महीने को “मौखिक कैंसर जागरूकता माह” के रूप मनाया है,यहां ओपीडी में आने वाले मरीजों को मुंह के कैंसर को लेकर जागरुक किया गया।

प्रो.शैली ने बताया कि किसी भी गैर उपचार मौखिक अल्सर के मामले में, होंठ, मसूड़ों, मुंह, गाल, जीभ, गले के अंदर देखे गए परिवर्तन या मुंह खोलने में परेशानी होती है, भोजन निगलने में परेशानी होती है, तो तुरंत दंत चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए, क्योंकि समय पर पहचान कर कैंसर जैसी बीमारी से भी निजात पायी जा सकती है । कैंसर का इलाज यदि समय रहते शुरू हो जाये,तो मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है।
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