बरेली: अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग और त्रेतायुग की हुई थी शुरुआत

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बरेली, अमृत विचार। अक्षय तृतीया मंगलकारी संयोग के बीच मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय 5:30 बजे पर और तृतीया तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि शेष अगले दिन सुबह 5:30 बजे तक रहेगा। इसी तरह रोहिणी नक्षत्र भी संपूर्ण दिन और रात एक बजकर 35 मिनट तक है। साथ ही …

बरेली, अमृत विचार। अक्षय तृतीया मंगलकारी संयोग के बीच मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय 5:30 बजे पर और तृतीया तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि शेष अगले दिन सुबह 5:30 बजे तक रहेगा। इसी तरह रोहिणी नक्षत्र भी संपूर्ण दिन और रात एक बजकर 35 मिनट तक है। साथ ही शोभन योग और मातंग नामक औदायिक योग है। सूर्य, चंद्र और शुक्र उच्च राशि में व गुरु और शनि स्वराशि में होंगे, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभकारी होगा।

अक्षय तृतीया का महत्व
ज्योतिषाचार्य पं. रमाकांत दीक्षित के अनुसार मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। द्वापर युग का अंत होकर इसी दिन से कलियुग की शुरुआत हुई थी। इस दिन विवाह, सगाई, मुंडन, गृहप्रवेश, नए उद्योगों का शुभारंभ यज्ञोपवीत आदि कार्य करना अत्यंत शुभ माना गया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया को सोना खरीदने से लाभ मिलता है। इस दिन जो कार्य किए जाते हैं, उसका फल अनंत गुना प्राप्त होता है।

इस दिन सुबह उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होने के पश्चात स्नान, दान, स्वाध्याय, हवन आदि करना शुभ फलदायी माना जाता है। दीन-दुखियों की सेवा, अन्न वस्त्रादि का दान आदि शुभ कर्मों की ओर अग्रसर रहने और मन, वचन व कर्म से धर्म का पालन करने से महापुण्य एवं सुख की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।

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