बरेली: बड़े नालों की नहीं हो रही सफाई, बरसात में जलभराव से जुझेंगा शहर
बरेली, अमृत विचार। शहर में जिस तरह से नाला सफाई का कार्य हो रहा है, उससे लग रहा है कि बरसात में लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, नाला सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। बड़े नालों की सफाई आधी अधूरी की जा रही है। कई जगह नाले के बीच …
बरेली, अमृत विचार। शहर में जिस तरह से नाला सफाई का कार्य हो रहा है, उससे लग रहा है कि बरसात में लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, नाला सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। बड़े नालों की सफाई आधी अधूरी की जा रही है। कई जगह नाले के बीच के हिस्से को छोड़ दिया जा रहा है।
नाले कूड़े से अटे पड़े हैं। कुछ जगह घास उग आई है। नाला जिस जगह गिरना चाहिए, उस जगह पर अतिक्रमण हो गया है, लेकिन नगर निगम को इससे सरोकार नहीं। पूर्व के अफसरों पर कार्रवाई नहीं करने की बात कहकर मौजूदा अफसर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि प्रमुख नालों पर अतिक्रमण हो गया है। निगम के अफसर जलनिकासी की समस्या को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
जाटवपुरा से नई बस्ती होते हुए नाला पीलीभीत रोड लल्ला मार्केट के सामने से गुलाबराय इंटर कॉलेज के पहले नैनीताल रोड क्रास करते हुए बानखाना होते हुए एसबीआई कालोनी के पास रेलवे लाइन क्रॉस करते हुए किला नदी की ओर जा रहा है।
वहीं रेलवे लाइन पार करने के बाद पब्लिक स्कूल से आगे गांधी नर्सरी के पीछे से होते हुए समाधि गोटिया,बाली जी विहार, सैदपुर पुलिया पार करके नाला किला नदी की ओर गया है। इस नाले में गंदगी का अंबार है। बानखाना में डेयरियां ज्यादा हैं। यहां गोबर भी इसी नाले पर बहा दिया जाता है।
नाला चोक होने की वजह से पानी आगे नहीं बढ़ पाता है। स्टेटबैंक कालोनी के पास नाले में गंदगी कम है लेकिन रेलवे लाइन पार नाले में गंदगी ज्यादा है। सफाई न होने से नाले में घास उग आई है। जाल भी पड़ा है। उसमें प्लास्टिक कपड़े फंसे हैं। रेलवे लाइन के आगे इसी नाले में छावनी की ओर से आ रहा नाला भी मिल जाता है।
यहां भी गंदगी पसरी है।नाले के दोनों ओर बनाई गई दीवारें कई जगह टूटी हैं। कुछ जगह नाले की दीवार पर ही लोगों ने दीवार बना दी है, लेकिन नगर निगम ने उन्हें टोका नहीं है। बानखाना के पार्षद शमीम अहमद बताते हैं कि नगर निगम ने नाला सफाई के नाम पर सिल्ट निकाली है। तड़ी झाड़ सफाई नहीं हुई है। नालों पर अतिक्रमण है।
उसे हटाया नहीं है। यही हाल रहा तो बरसात में दिक्कत आनी तय है। अफसर सुनवाई नहीं कर रहे हैं। क्षेत्र में सड़क बनाने के लिए 60 लाख का ठेका हुआ है लेकिन यहां पत्थर डालकर काम खत्म कर दिया गया है। ईद के दिन कई लोग इसी पत्थर वाली सड़क पर गिर कर लोग चोटिल हुए हैं।
वे बताते हैं कि नाला सफाई के नाम पर निगम महज खानापूर्ति कर रहा है। वास्तविक सफाई हो जाए तो जनता को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अशोक बताते हैं कि शहर में 23 बड़े नालों की सफाई निर्माण विभाग के जिम्मे है। जाटवपुरा ,नईबस्ती, बानखाना वाला नाले की सफाई कब हुई है। इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।
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