गाजियाबाद: मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे भूमि घोटाले में DM निधि सस्पेंड, सीएम योगी ने FIR का दिया आदेश
गाजियाबाद। योगी सरकार ने बुधवार को भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले में हुए मामले को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। आपको बतादें कि मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले पर बड़ी कार्रवाई हुई है। जिसको लेकर गाजियाबाद की पूर्व डीएम निधि केसरवानी को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले को लेकर पूर्व डीएम के …
गाजियाबाद। योगी सरकार ने बुधवार को भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले में हुए मामले को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। आपको बतादें कि मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले पर बड़ी कार्रवाई हुई है। जिसको लेकर गाजियाबाद की पूर्व डीएम निधि केसरवानी को सस्पेंड कर दिया गया है।
मामले को लेकर पूर्व डीएम के खिलाफ FIR का आदेश भी सीएम योगी ने दिया है। जानकारी मुताबिक 2004 बैच की अफसर निधि फिलहाल केंद्र सरकार में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर में उप सचिव हैं। इस घोटाले में डीएम व अन्य अफसरों ने किसानों से सस्ते रेट पर जमीन खरीद ली। फिर उसे अपने रिश्तेदारों को खरीदवाकर सरकार को कई गुना ऊंचे रेट पर बिकवा दी थी।
जानकारी मिलने पर मेरठ मंडल के पूर्व आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने अधिसूचना के बाद प्रतिकर की दर बढ़ाने और बढ़ी दर से मुआवजा बांटने के लिए गाजियाबाद के डीएम विमल कुमार शर्मा और निधि केसरवानी समेत कई अफसरों-कर्मचारियों को दोषी पाया था। 2019 में हुई उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में इन दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई की मंजूरी दी गई थी। जिसके बाद विमल शर्मा रिटायर हो चुके हैं।
अनुभाग अधिकारी और समीक्षा अधिकारी भी सस्पेंड
आपको बतादें कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने बुधवार को एक बयान में कहा है कि इस केस से जुड़ी पत्रावली की जांच रिपोर्ट आने के बावजूद कार्रवाई करने में देरी करने वाले नियुक्ति विभाग के अनुभाग अधिकारी व समीक्षा अधिकारी को भी निलंबित किया जाएगा। अनुसचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए हैं।
आपको बतादें कि मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे 82 किलोमीटर लंबा है। 31.77 किमी हिस्सा गाजियाबाद में है। गाजियाबाद में भूमि अधिग्रहण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम- 1956 की धारा-3ए की अधिसूचना 8 अगस्त 2011 को जारी हुई थी। इस धारा के तहत भूमि अधिग्रहण का इरादा जताया गया है।
धारा-3डी के तहत भूमि को अधिगृहीत किए जाने की अधिसूचना 2012 में जारी की गई। अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का अवार्ड 2013 में घोषित हुआ। मामले की शिकायत होने पर मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने इसकी जांच कराई। 29 सितंबर 2017 को शासन को सौंपी गई।
जांच रिपोर्ट में उन्होंने धारा-3डी की अधिसूचना के बाद जमीन खरीदने, आर्बिट्रेटर द्वारा प्रतिकर की दर बढ़ाने और बढ़ी दर से मुआवजा दिए जाने को गलत ठहराया। इन चार गांवों की मुआवजा राशि जहां पहले 111 करोड़ रुपए थी। आर्बिट्रेशन के तहत प्रतिकर की दर बढ़ाए जाने से यह रकम 486 करोड़ रुपए हो गई।
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