कानपुर: खून की जांच से पता लगेगा अल्जाइमर का खतरा, GSVM मेडिकल कॉलेज और स्वीडन की यूनिवर्सिटी मिलकर करेगी काम
कानपुर। अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो महज खून की जांच से भविष्य में होने वाले अल्जाइमर के खतरे का बहुत पहले ही पता चल जाएगा। इसकी पहचान के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने कमर कसी है, जिसमें स्वीडन की गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च सहयोग करेगी। शोध का …
कानपुर। अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो महज खून की जांच से भविष्य में होने वाले अल्जाइमर के खतरे का बहुत पहले ही पता चल जाएगा। इसकी पहचान के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने कमर कसी है, जिसमें स्वीडन की गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च सहयोग करेगी। शोध का खाका जल्द ही तैयार किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज को काउंसिल से आर्थिक सहायता भी मिलेगी। विशेषज्ञ अल्जाइमर के मार्कर को विकसित करने की कोशिश करेंगे, जिसका पता खून की जांच से लगेगा।
अल्जाइमर दिमाग से संबंधित बीमारी है, जिसमें मरीज की स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है। यह समस्या ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों में होती है, लेकिन उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थायरॉइड, दिल व गुर्दा रोग होने पर जल्दी होने की संभावना रहती है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज संबद्ध न्यूरो साइंस सेंटर और उर्सला अस्पताल में कई मरीज अल्जाइमर की समस्या लेकर आते हैं। उनमें भूलने की शिकायत रहती है। उनको दवाओं के साथ ही कई तरीके बताए जाते हैं, जिससे उनको आराम मिल सके। न्यूरो साइंस सेंटर के इंचार्ज प्रो. मनीष सिंह और गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी के डॉ. स्टीवर्ट मिलकर कार्य करेंगे। मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी के डॉक्टर भी सहयोग करेंगे।
पुराने रोगियों का लेंगे सैंपल
विशेषज्ञों के मुताबिक शोध में अल्जाइमर रोगियों से सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड का नमूना लिया जाएगा। यह फ्लूड एक स्पष्ट, रंगहीन द्रव्य रहता है जो ऊतक के भीतर पाया जाता है। यह सभी वर्टिब्रेट्स (कशेरुकियों) के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को घेरे रहता है।
रिपोर्ट- शशांक शेखर भारद्वाज
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