बरेली: शहामतगंज के पुल से नहीं हो रहा व्यापारियों को नुकसान

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अमृत विचार, बरेली। भाजपा सरकार में विकास कार्य प्राथमिकता में है। कुतुबखाना पुल भी उसी का हिस्सा है। इसमें न तो कोई जनप्रतिनिधि समझौता करेगा और न सरकार। यह कहना है शाहमतगंज के व्यापारियों का। कुतुबखाना पुल बनाने के विरोध में क्षेत्र के व्यापारी आंदोलित हैं। उनका यह आंदोलन कितना रंग लाएगा यह तो वक्त …

अमृत विचार, बरेली। भाजपा सरकार में विकास कार्य प्राथमिकता में है। कुतुबखाना पुल भी उसी का हिस्सा है। इसमें न तो कोई जनप्रतिनिधि समझौता करेगा और न सरकार। यह कहना है शाहमतगंज के व्यापारियों का। कुतुबखाना पुल बनाने के विरोध में क्षेत्र के व्यापारी आंदोलित हैं। उनका यह आंदोलन कितना रंग लाएगा यह तो वक्त ही बताएगा।

वे बताते हैं शाहमतगंज के व्यापारियों का आंदोलन ज्यादा तेज था। वे स्थानीय नेताओं से लेकर तत्कालीन सपा सरकार में मुख्यमंत्री से मिलकर आए थे लेकिन शहामतगंज पुल बना और अब यह शहर की रीढ़ है। शहामतगंज के व्यापारी भी मानते हैं कि पुल बनने से कुछ समय के लिए परेशानी होगी, लेकिन बाद में इसका कारोबार पर असर नहीं पड़ेगा। शहामतगंज के व्यापारी कुतुबखाना के व्यापारियों को सलाह देते हैं कि विरोध न करें। सहयोग करें। पुल बनकर ही रहेगा।

शहामतगंज पुल और कुतुबखाना पुल निर्माण को लेकर एक समानता है। शहामतगंज पुल सपा सरकार में बना। तब भी खूब विरोध हुआ। अब कुतुबखाना पुल भाजपा सरकार में बन रहा है। शहामतगंज में निर्माण के दौरान कुछ दुकानदारों ने दूसरी जगह कारोबार शुरू किया लेकिन पुल तैयार हुआ तो वह पुरानी जगह पर आ गए। कुतुबखाना के व्यापारियों के आंदोलन के बीच अमृत विचार ने शहामतगंज के व्यापारियों से बातचीत की। उनसे जानना चाहा कि जब शाहमतगंज में पुल बन रहा था तब उनके कारोबार पर क्या असर पड़ा और पुल बनने के बाद कारोबार की क्या स्थिति है।

बरेली मर्चेंट एसोसिएशन के संरक्षक जफर बेग ने बताया शहामतगंज पुल निर्माण के समय लगभग कारोबार बंद हो गए थे। पुल बनने के बाद कारोबार की स्थिति ठीक है। पुल नहीं था तब इस मार्ग पर जाम, वायु और ध्वनि प्रदूषण ज्यादा था। पुल बनने के बाद वायु प्रदूषण तो खत्म हो गया लेकिन ध्वनि प्रदूषण बढ़ा। ई रिक्शा की वजह से जाम लगा रहता है। पुलिस को इसे कंट्रोल करना चाहिए। पुल बनने से व्यापारी के कारोबार पर असर नहीं पड़ा है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव ऐरन बताते हैं कि पुल बनने से पहले कुतुबखाना के व्यापारियों का चितिंत होना स्वाभाविक है। वे अपनी जगह सही कर रहे हैं। लेकिन मैं तर्जुबे से व्यापारियों को कहना चाहूंगा कि पुल बनने से कुछ समय के लिए उन्हें परेशानी होगी। पुल बनने से कारोबार पर असर नहीं होगा। व्यापारी विरोध न करें। पुल बनने में सहयोग करें ताकि काम जल्दी पूरा हो जाए।

शहामतगंज में कन्फेशनरी व्यापारी गिरधर खट्टर कहते हैं कि शहामतगंज का व्यापारी भी पुल बनने से पहले कारोबार को लेकर चितिंत था, लेकिन सेतु निगम ने व्यापारियों को ज्यादा परेशान नहीं होने दिया। 18 माह में पुल बनकर तैयार हो गया। जिस दुकान के आगे पिलर बनता, उस दुकान का कारोबार जरूर कुछ समय प्रभावित होता था लेकिन पुल बनने के बाद कोई कारोबार प्रभावित नहीं है।

शहामतगंज चौराहे पर मिठाई की दुकान के प्रबंधक कैसर रजा बताते हैं कि दुकान के पास ही दो -दो पिलर हैं। जब यह बन रहे थे, तभी परेशानी हुई थी लेकिन उसके बाद पुल बनता रहा और दुकान चलती रही। पुल बनने से दिक्कत तो नहीं हुई लेकिन ई रिक्शा वालों ने दुकानदारों का कारोबार चौपट कर रखा है। इनकी वजह से जाम लगता है। तेज हार्न ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाता है। इनकी रोकथाम होनी चाहिए।

मो. मुनीस बताते हैं कि पुल बनने से सीवर लाइन डैमेज हो गई। दोबारा डाली गई तो ऐसी जगह डाली गई जिससे यहां के घरों में रहने वालों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। गंदगी नालियों में रहती है। पुल बनने से यहां के लोगों को यही समस्या हुई है। कारोबार पर असर नहीं पड़ा है। जैसा पहले था उसी तरह अब भी सभी का कारोबार चल रहा है।

शहामतगंज के ही विजय कुमार बताते हैं कि कुतुबखाना के व्यापारियों का चिंता करना वाजिब है, लेकिन उन्हें शहामतगंज के व्यापारियों से सीख लेनी चाहिए। यहां कारोबार पर पुल बनने से कोई फक्र नहीं पड़ा है। जो व्यापारी पहले यहां कारोबार कर रहे थे, वही अब भी हैं। कुतुबखाना के व्यापारी चिंता न करें। पुल कारोबार के साथ जनता के लिए लाभका

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