प्रोफेसर के विवादित बयान से लविवि में हंगामा, विरोध में उतरे छात्र, प्रॉक्टर आफिस में बवाल, जानें क्या है पूरा मामला
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर की ओर से काशी विश्वनाथ मंदिर और हिंदू देवी-देवाताओं पर दिए गए विवादित बयान के बाद मंगलवार को हंगामा मच गया। काफी संख्या में छात्र आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ प्रॉक्टर आफिस पहुंच गये, जिसे देख विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गये। छात्रों का आक्रोश देख आनन-फानन में …
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर की ओर से काशी विश्वनाथ मंदिर और हिंदू देवी-देवाताओं पर दिए गए विवादित बयान के बाद मंगलवार को हंगामा मच गया। काफी संख्या में छात्र आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ प्रॉक्टर आफिस पहुंच गये, जिसे देख विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गये। छात्रों का आक्रोश देख आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह हालात को संभाला। इस दौरान छात्रों नारेबाजी करते हुए विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक के पास प्रदर्शन किया।
लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर रविकांत ने डिजिटल चैनल की डिबेट में काशी विश्वनाथ मंदिर मामले में व देवी-देवताओं को लेकर विवादित प्रतिक्रिया दी थी। इससे नाराज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने डॉ. रविकांत के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर विभाग का घेराव किया। इस दौरान शिक्षक विभाग से निकल गए। इसके बाद प्रॉक्टर ऑफिस का घेराव किया और जय श्रीराम, हर-हर महादेव के नारे लगाए। प्रॉक्टर और पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। शिक्षक के माफी मांगने पर कार्यकर्ता अड़े रहे। इस संबंध में कुलपति और प्रॉक्टर के पास छात्रों ने प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
छात्रों ने की निलंबन की मांग
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता व समर्थन में आये छात्रों ने प्रोफेसर के निलंबन की मांग उठाई है। एबीवीपी के अक्षय प्रताप सिंह ने कहा कि हिन्दी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर ने डिबेट के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। यह बहुत निंदनीय है। ऐसे शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रॉक्टर ने अपनी सूझबूझ से प्रोफेसर को बचाया
चीफ प्रॉक्टर अगर सतर्क न रहते तो विश्वविद्यालय में हंगामा और बढ़ सकता था। प्रॉक्टर ने बिना किसी देरी के पुलिस काे मामले की सूचना दी और प्रोफेसर रविकांत को अपने कार्यालय में बंद कर दिया। फिर भी छात्र प्रोफेसर रविकांत को बाहर निकालने की मांग करते रहे।
प्रतिक्रिया पर प्रोफेसर ने मांगी माफी
प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने छात्रों को आक्रोशित देख सफाई देते हुए कहा कि अगर इससे किसी को ठेस पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं लेकिन इस दौरान उन्होंने तब भी अपनी प्रतिक्रिया को सही बताया।
विश्वविद्यालय के अन्य प्रोफेसर भी नाराज
विश्वविद्यालय के दूसरे शिक्षकों ने विवादित बयान को शर्मनाक बताया है। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (लूटा) के वाट्सएप ग्रुप पर इसे घोर अपमानजनक बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है। एक शिक्षक द्वारा इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी को अस्वीकार्य बताया है। शिक्षक के रूप में हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इस तरह की गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी अक्षम्य है।
मॉब लिचिंग की बन गई थी संभावना
विश्वविद्यालय में मौके पर पुलिस नहीं पहुंचती तो मॉबलिचिंग की संभावना बन सकती थी। पुलिस कर्मियों ने बताया आक्रोशित छात्र बार-बार आरोपी प्रोफेसर की प्रतिक्रिया को गलत बताते हुए रविकांत को अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रहे थे। ऐसे में पुलिस नहीं होती तो मामला बिगड़ सकता था।
विश्वविद्यालय प्रशासन को बताया गूंगा बहरा
वहीं दूसरी ओर प्रोफेसर रविकांत ने सोशल मीडिया पर लविवि प्रशासन को गूंगा बहरा बताते हुए खुद की जान को खतरा बताया। इस दौरान प्रोफेसर ने पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगाया, लेकिन बाद में उसे डिलिट भी कर दिया। इसका स्क्रीनशॉट भी वायरल हो हो रहा है।
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