ताजमहल विवाद: 20 कमरों को खोलने की याचिका हुई खारिज, याचिकाकर्ता को HC ने लगाई फटकार, कहा- पहले रिसर्च करो तब कोर्ट आना
लखनऊ। आगरा का ताजमहल मकबरा है या मंदिर यह मामला गहरा गया है। ऐसे में ताजमहल को लेकर दायर की गई याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई। ताजमहल के तहखाने में बने 20 कमरों को खोलने की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया। ताजमहल की …
लखनऊ। आगरा का ताजमहल मकबरा है या मंदिर यह मामला गहरा गया है। ऐसे में ताजमहल को लेकर दायर की गई याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई। ताजमहल के तहखाने में बने 20 कमरों को खोलने की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया।
ताजमहल की सुनवाई को लेकर हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई है। जज डीके उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से कहा कि पहले रिसर्च करो कि ताजमहल का निर्माण किसने किया था, पहले इस मसले पर रिसर्च करो।
उन्होंने आगे कहा कि यूनिवर्सिटी जाकर इस विषय पर जानकारी एकत्र करो। पीएचडी करो और यदि कोई रोके तो हमारे पास आना। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि इस विषय पर पहले जानकारी हासल करो।
आज आप ताजमहल के कमरे देखने की मांग कर रहे हैं कल को आप कहेंगे कि हमें जज के चेंबर में जाना है। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह जाएं और एमए, नेट जेआरएफ करें और उसके बाद शोध में ऐसा विषय चुनें। फिर अगर कोई संस्थान उन्हें यह शोध करने से रोके तो हमारे पास आएं।
याचिकाकर्ता रजनीश सिंह के वकील ने कहा कि देश के नागरिकों को ताजमहल के बारे में सच जानने की जरूरत है। याचिकाकर्ता ने कहा- मैं कई आरटीआई लगा चुका हूं। मुझे पता चला है कि कई कमरे बंद हैं और प्रशासन की ओर से बताया गया कि ऐसा सुरक्षा कारणों की वजह से किया गया है।
बता दें, ताजमहल में बने 22 कमरों को खोलने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि कई सालों से बंद इन कमरों में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां और शिलालेख मौजूद हैं. फिलहाल, आज इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई चल रही है।
