पीलीभीत: लाश का इलाज करने वाले को फिर मिलेगी अस्पताल चलाने की परमिशन
अमृत विचार, पीलीभीत। साढ़े तीन साल पहले इलाज करने वाले डॉक्टर के सील अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग के अफसर इन दिनों मेहरबान हैं। लाश का इलाज करने वाले डॉक्टर को परमिशन देने की कवायद शुरू कर दी गई है। इतना ही नहीं इस फाइल पर रिपोर्ट न लगाने वाले लिपिकों से फाइल तक हटा ली …
अमृत विचार, पीलीभीत। साढ़े तीन साल पहले इलाज करने वाले डॉक्टर के सील अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग के अफसर इन दिनों मेहरबान हैं। लाश का इलाज करने वाले डॉक्टर को परमिशन देने की कवायद शुरू कर दी गई है। इतना ही नहीं इस फाइल पर रिपोर्ट न लगाने वाले लिपिकों से फाइल तक हटा ली गई थी। जिसके बाद अफसर खुद ही इस मामले अपने स्तर से डील कर रहे हैं। जबकि पुलिस और डॉक्टरों के पैनल ने डॉक्टर की डिग्री को फर्जी बताते हुए प्रैक्टिस करने योग्य नहीं बताया था।
लेकिन सांठगांठ के चलते इस अस्पताल को दोबारा से परमिशन और डॉक्टर को प्रैक्टिस करने की अनुमति को सीएमओ कार्यालय में भेजी गई फाइल को स्पीड से चलाया जा रहा है। ताकि उसे जल्द से जल्द परमिशन मिल सके। इधर, डॉक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के आश्वासन पर शहर में अपने जगह होर्डिग भी लगवा दिए हैं। परमिशन मिलने के बाद न जाने अब कौन से मरीज की जिंदगी के साथ दोबारा से खिलवाड़ किया जाएगा।
शहर के शुगर फैक्ट्री रोड पर स्थित एक अस्पताल में वर्ष 2019 जून माह में पूरनपुर के रहने वाले राजू की लाश का इलाज करने का मामला सुर्खियों में रहा था। इस प्रकरण में मृतक के परिवार वालों ने मामले की शिकायत प्रशासन से लेकर शासन तक की थी। इस प्रकरण में लाश का इलाज करने वाले डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा मामला शासन तक पहुंचने के बाद जब इसकी उच्च स्तरीय जांच की गई थी।
इधर, पुलिस और प्रशासन ने डॉक्टर पर लगे आरोपों की सत्यता जांचने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर डॉक्टर और अस्पताल के पैनल में शामिल सभी डॉक्टरों की डिग्री की जांच करने के निर्देश दिए थे। इस पर तीन सदस्यीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में डॉक्टर की मास्टर डिग्री फर्जी बताई थी। लेकिन मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते सभी मैनेज करने में जुट गए थे। लेकिन किसी वजह से मामला दब नहीं सका था।
तीन अगस्त 2019 को डॉक्टर का अस्पताल सीज कर दिया गया था। इसके बाद फर्जी डिग्री पर मरीजों का इलाज करने के मामले में डॉक्टर फरार हो गया था। लेकिन अब साढ़े तीन साल बाद जब हालत सामान्य हुए तो डॉक्टर ने दोबारा से प्रैक्टिस करने और अस्पताल का पंजीकरण करने की अनुमित मांगी है। डॉक्टर अपनी यूजी की डिग्री यानी एमबीबीएस के आधार पर प्रैक्टिस करने की मांग की है तो वहीं अस्पताल संचालन के लिए परिवार के सदस्यों के नाम पर आवेदन किया है।
जिसके बाद स्वास्थ्य महकमा लाशों का इलाज करने वाले डॉक्टर को प्रैक्टिस और अस्पताल के पंजीकरण की परमिशन देने में जुट गया है। बिना परमिशन के ही डॉक्टर साहब ने शहर के गौहनिया चौराहा से नकटादाना तक, तो वहीं छतरी चौराहा से लेकर असम चौराहा तक अपने होर्डिंग में लगवा दिए हैं। जबकि अभी परमिशन नहीं मिली है।
अस्पताल के पंजीकरण और प्रैक्टिस को लेकर अनुमित मांगी गई है। मामले की जांच कराई जा रही है। अभी अनुमति नहीं दी गई है। नियमानुसार ही कार्यवाही की जाएगी–– डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ।
