आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा के लिए सैन्य ताकत बढाना जरूरी: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि मुख्यभूमि से दूर देश के आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा करने के लिए दूर दराज के क्षेत्रों तक सैन्य ताकत को बढाना जरूरी है। सिंह ने मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में बनाये गये दो स्वदेशी युद्धपोतों आईएनएस सूरत और आईएनएस उदयगिरि के जलावतरण …

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि मुख्यभूमि से दूर देश के आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा करने के लिए दूर दराज के क्षेत्रों तक सैन्य ताकत को बढाना जरूरी है। सिंह ने मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में बनाये गये दो स्वदेशी युद्धपोतों आईएनएस सूरत और आईएनएस उदयगिरि के जलावतरण के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा, यदि कोई भी देश मेनलैंड से दूर अपने आर्थिक या सामरिक हितों की रक्षा करना चाहता है, तो उसे मेनलैंड से काफी दूर तक के क्षेत्रों में सैन्य ताकत को बढाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भौगाेलिक स्थिति के आधार पर समुद्र के साथ हमारा पुराना नाता रहा है। समुद्र ने एक तरफ हमें प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराकर समृद्ध किया है, तो दूसरी ओर इसने हमें दुनिया भर से जोड़ने का भी काम किया है। नौसेना की भूमिका को इस मामले में महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि देश मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध बनने की दिशा में बढ रहा है और ऐसे में इसे वैश्विक ताकत के रूप में पहचान दिलाने में नौसेना की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा , हमारे लिए यह गर्व की बात है कि नौसेना स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बी के विनिर्माण में पहले से ही बहुत आगे रही है। पिछले पांच वित्त वर्ष में नौसेना के आधुनिकीकरण बजट का दो–तिहाई से अधिक हिस्सा स्वदेशी खरीद पर खर्च किया गया है। नौसेना के लिए आर्डर किये गये 41 जलपोत और पनडुब्बियों में से 39 देश में ही बन रहे हैं और यह नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति वचनबद्धता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि सैन्य साजो सामान की दुनिया भर में मांग लगातार बढ रही है और इस मौके का फायदा उठाते हुए हमें अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल कर देश को जलपोत विनिर्माण का हब बनाने की ओर बढना चाहिए। हिन्द प्रशांत क्षेत्र को आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौतों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में जिम्मेदार समुद्री पक्षधारक के रूप में सहमति पर आधारित सिद्धांतों और शांतिपूर्ण, मुक्त , नियम आधारित और स्थिर समुद्री व्यवस्था का समर्थक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया, दोनों युद्धपोत न केवल हमारी सामरिक ताकत, बल्कि हमारी आत्मनिर्भरता की ताकत से भी दुनिया को परिचित कराएंगे।

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