लखनऊ : कोयला आयात के लिए राज्यों पर दबाव डाल रही है केंद्र सरकार

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लखनऊ। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को फिर से कोयला आयात करने के निर्देश जारी करने को केंद्र सरकार द्वारा राज्यों पर बेजा दबाव डालने की कोशिश करार दिया है। फेडरेशन ने अपनी मांग दोहराते हुये कहा है कि कोयला संकट में राज्य के बिजली उत्पादन गृहों का कोई दोष …

लखनऊ। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को फिर से कोयला आयात करने के निर्देश जारी करने को केंद्र सरकार द्वारा राज्यों पर बेजा दबाव डालने की कोशिश करार दिया है। फेडरेशन ने अपनी मांग दोहराते हुये कहा है कि कोयला संकट में राज्य के बिजली उत्पादन गृहों का कोई दोष नहीं है, इसलिये कोयला आयात के अतिरिक्त खर्च का केंद्र सरकार को वहन करना चाहिए।

इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बुधवार को बताया कि केंद्र सरकार के बुधवार को दोबारा जारी आदेश में कहा गया है कि 31 मई तक जो ताप बिजली घर कोयला आयातित का आदेश नहीं करेंगे और 15 जून तक आयातित कोयले की ब्लेंडिंग नहीं प्रारंभ करेंगे। उन्हें इसके बाद 10 प्रतिशत के बजाय 15 प्रतिशत कोयला 31 अक्टूबर तक आयात करना होगा। पहली जून के बाद घरेलू कोयले के आवंटन में भी ऐसे ताप बिजली घरों को पांच प्रतिशत कम कोयला दिया जाएगा जिन्होंने आयातित कोयले का आदेश नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि एक ओर तो केंद्र सरकार अप्रैल तक यह दावा करती रही है कि कोल इंडिया का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है और कोयले का कोई संकट नहीं है। दूसरी केंद्र सरकार यह कह रही है कि राज्य के ताप बिजली घर कोयला आयात करें और अब यह कोयला आयात का कार्यक्रम 31 मार्च 2023 तक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्यों के अधिकांश ताप बिजली घर आयातित कोयले के लिए डिजाइन नही किये गए हैं। आयातित कोयला ब्लेंड करने से ताप बिजलीघरों के बॉयलर में ट्यूब लीकेज बढ़ जाएंगे।

उन्होंने कहा कि अभी भी देश के 108 ताप बिजली घरों के पास केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नोरमैटिव स्टॉक की तुलना में 25 प्रतिशत से कम कोयला है जिसे क्रिटिकल स्टेज कहा जाता है।

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