अलीगढ़: ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर AMU के पूर्व प्रोफेसर ने किया बड़ा दावा, कहा- यहां पहले मंदिर ही था
अलीगढ़। AMU के पूर्व प्रोफेसर और मुफ्ती जाहिद खान ने ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर बड़ा दावा किया है। जिसका निर्माण अकबर के शासन काल में किया गया। उन्होंने ज्ञानवापी में पहले मंदिर होने का दावा किया और कहा कि मस्जिद बनाने का निर्णय हिंदू राजा का था। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा इसलिए किया था …
अलीगढ़। AMU के पूर्व प्रोफेसर और मुफ्ती जाहिद खान ने ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर बड़ा दावा किया है। जिसका निर्माण अकबर के शासन काल में किया गया। उन्होंने ज्ञानवापी में पहले मंदिर होने का दावा किया और कहा कि मस्जिद बनाने का निर्णय हिंदू राजा का था।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसा इसलिए किया था क्योंकि परिसर में हिंदू रानी का अपहरण हो गया था। दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। जिस कारण यह स्थान अपवित्र हो गया था। राजा इस स्थान को नष्ट करना चाहते थे। लेकिन बाद में उन्होंने इसे मस्जिद के लिए दे दिया।
हिंदू राजा टोडरमल और राजा मानसिंह ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने आगे कहा कि अकबर के शासन काल में टोडरमल उनके वित्त मंत्री थे। राजा मान सिंह अकबर के रक्षा मंत्री व सेनापति थे।
सरकारी खर्चे से ही इस मंदिर का निर्माण भी हुआ था। लेकिन बाद में औरंगजेब के शासन में हिंदू राजाओं की सहमति से ही इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया था। अब जनता को मुद्दों से भटकाने के लिए दोबारा इस मामले को उठाया जा रहा है।
मुफ्ती ने कहा कि रानी की मौत के बाद हिंदू राजाओं ने कहा कि यह स्थान अब अपवित्र हो गया है, इसलिए इसे ढहा दिया जाए। जिसके बाद मूर्तियां निकालकर और मंत्र पढ़कर इसे दूसरी जगह पर स्थापित कर दिया और जगह को नष्ट कर दिया। हिंदू राजाओं की सहमति से मंदिर की मूर्तियों को वहां से दूसरी जगह स्थापित किया और फिर यहां पर मस्जिद बनाई गई।
उन्होंने कहा कि जिस तरह बाबरी मस्जिद का मुद्दा 40 साल तक चलता रहा, उसी तरह अब ज्ञानवापी के मुद्दे को उठाया जा रहा है। देश में धर्म के नाम पर फूट डालकर गुलाम बनाने का यह षड्यंत्र है।
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