रामपुर पहुंचे आजम खां का छलका दर्द, कहा- तारीख को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है मिटाया नहीं

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

रामपुर, अमृत विचार। पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां ने कहा कि तारीख को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है लेकिन, मिटाया नहीं जा सकता। आने वाली नस्लें इस इतिहास को पढ़कर रोएंगी। उन्होंने कहा कि उनके खून-पसीने से सूखा हुआ दरख्त सरसब्ज हुआ उसे उजाड़ा जा रहा है। उन पर और उनके घरवालों पर बहुत जुल्म हुए …

रामपुर, अमृत विचार। पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां ने कहा कि तारीख को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है लेकिन, मिटाया नहीं जा सकता। आने वाली नस्लें इस इतिहास को पढ़कर रोएंगी। उन्होंने कहा कि उनके खून-पसीने से सूखा हुआ दरख्त सरसब्ज हुआ उसे उजाड़ा जा रहा है। उन पर और उनके घरवालों पर बहुत जुल्म हुए हैं। उन्हें ऐसी बैरक में रखा गया जो अंग्रेजों की जमाने की है और कुछ ही दूरी पर फांसीघर था। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब उन्हें जेल में डाला गया। दोपहर से शाम तक उनके आवास पर भीड़ आजम खां का इंतजार करती रही।

सीतापुर जेल से छूटने के बाद रामपुर पहुंचने पर आजम खां का जोरदार इस्तकबाल हुआ। करीब शाम चार बजे शहर के मोहल्ला मीर बाज खां स्थित अपने घर के करीब पहुंचे आजम खां ने अपनी गाड़ी से निकलकर भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि उनके ऊपर बहुत जुल्म हुए हैं। वह जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में यूनियन के सेक्रेट्री थे तब भी उन्हें 19 महीने के लिए जेल में डाल दिया गया। वह जिंदगी का आगाज था अब जिंदगी के आखिरी पड़ाव में जेल में डाल दिया गया। सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकारें सजाती संवारती हैं लेकिन सब कुछ उजाड़ दिया गया है। रामपुर में बर्बादी इस लिए ज्यादा हुई है कि यहां मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है।

आजम खां ने कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है लेकिन, वक्त कभी एकसा नहीं रहता जुल्म की हुकूमत ज्यादा दिनों तक नहीं रहती है। कहा कि उनके खून पसीने से सूखा हुआ दरख्त सरसब्ज हुआ है उम्मीद जताते हुए कहा कि रामपुर में बहार जरूर आएगी। संबोधन के दौरान दो बार आजम बोलते-बोलते रुहांसा भी हो गए और उन्होंने किसी तरह अपने जज्बात को काबू में किया। ऐसी जेल में रखा गया जोकि अंग्रेजों के जमाने की बनी हुई थीं कहा कि उनकी बैरक के करीब ही फांसी घर भी था। जेल में जब तक उनके साथ पत्नी और बेटा रहे वक्त कट जाता था लेकिन, पत्नी और बेटे की जमानत के बाद जेल की काल कोठरी में जैसे-तैसे वक्त काटा गया।

आजम खां ने कहा कि सरकारें सजाती संवारती हैं यह सरकार उजाड़ रही है। जौहर यूनिवर्सिटी की ओर इशारा करते हुए कहा कि हम तो नहीं होंगे लेकिन, हमारी आने वाली नस्लें इस तालीम के पौधे का बहुत बड़ा रूप देखेंगी। कहा कि याद रखो तारीख को तोड़ा मरोड़ा तो जा सकता है लेकिन इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता। मेरे साथ मेरे घर के साथ मेरे खानदान के साथ मेरे शहर और मेरे जिले के साथ बहुत जुल्म हुआ है।  इस तारीख को पढ़कर आने वाली नस्ल रोएंगी। यह चमन इस लिए उजाड़ दिया गया कि टोपी वालों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि क्योंकि, यहां तुम्हारी आबादी और तुम्हारी गिनती ज्यादा है।

उन्होंने कहा, यही सोचा था कि जिंदा आएंगे तो गाजी होंगे और जनाजा जाएगा तो शहीद कहलाएंगे हम लोगों के बीच जिंदा आ गए हैं। वीडियो काफ्रेंसिंग के दौरान मैंने जज साहब से कहा था कि ऊपर वाले ने आपको पावर्स डेलीगेट्स की हैं उसने अपने इख्तियारात देकर इस कुर्सी पर बैठाला है अब आपके हाथ है कि इंसाफ करें या नाइंसाफी करें। कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ से मिला है और हमें उम्मीद थी कि अदालत से हमें इंसाफ जरूर मिलेगा। इससे पहले दोपहर से उनके आवास पर भीड़ उनका इंतजार करती रही।

ये भी पढ़ें : जेल से रिहाई के बाद रामपुर पहुंचे आजम खान, हुआ स्वागत

संबंधित समाचार