दो विभागों के बीच फंसे हैं एम्बुलेंसकर्मी, 53 जिलों में 170 मोबाइल यूनिट कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन
लखनऊ। घर पहुंचकर लोगों को एम्बुलेंस से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले प्रदेश के करीब 1000 कर्मचारी दो विभागों के बीच अपने वेतन के भुगतान के लिए जूझ रहे हैं। कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारी वेतन की मांग को लेकर लगातार नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) व स्वास्थ्य महानिदेशालय के चक्कर …
लखनऊ। घर पहुंचकर लोगों को एम्बुलेंस से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले प्रदेश के करीब 1000 कर्मचारी दो विभागों के बीच अपने वेतन के भुगतान के लिए जूझ रहे हैं। कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारी वेतन की मांग को लेकर लगातार नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) व स्वास्थ्य महानिदेशालय के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
लखनऊ समेत प्रदेश के 53 जिलों में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) का संचालन हो रहा है। इसका जिम्मा केएचजी हेल्थ सर्विसेज के पास है। प्रत्येक एम्बुलेंस में डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट समेत पांच स्टाफ मौजूद रहता है। ये एम्बुलेंस गांव में मरीज के घर के पास जाकर इलाज मुहैया कराते हैं। मुफ्त दवाओं का वितरण करते हैं। खून संबंधी जांचें की जाती हैं।
बिल भुगतान अटका
स्वास्थ्य विभाग से सेवा प्रदाता संस्था को बिल का भुगतान न होने से दूर दराज के ग्रामीण व शहरी इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने वाले कर्मियों को अब तक वेतन नहीं मिल सका है। कंपनी बिल स्वास्थ्य महानिदेशालय भेजती है। महानिदेशालय से बिल एनएचएम जाता है, इसके बाद भुगतान होता है।
बिल का भुगतान न होने से स्थिति बदइंतजामी बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों ने कंपनी के अधिकारियों से शिकायत की। इसके बावजूद अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। परेशान कर्मचारी एनएचएम दफ्तर गए लेकिन वहां अधिकारियों ने मांग को अनसुना कर दिया है। वेतन भुगतान न होने से कर्मचारी भुखमरी के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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