देवरिया: कभी गरीबों का भोजन रहा बाटी-चोखा, अब चढ़ा शाही लोगों की जुबान पर
देवरिया। उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य बिहार के पूर्वांचल इलाके में कभी गरीबों का मुख्य भोजन रहा बाटी-चोखा का स्वाद अब बदलते जमाने में शाही लोगों की जुबान पर भी चढ़ गया है। पूर्वांचल के कभी अभावग्रस्त जिले के रूप में जाने गये देवरिया, गोरखपुर, बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, बस्ती, कुशीनगर आदि जिलों समेत बिहार …
देवरिया। उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य बिहार के पूर्वांचल इलाके में कभी गरीबों का मुख्य भोजन रहा बाटी-चोखा का स्वाद अब बदलते जमाने में शाही लोगों की जुबान पर भी चढ़ गया है।
पूर्वांचल के कभी अभावग्रस्त जिले के रूप में जाने गये देवरिया, गोरखपुर, बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, बस्ती, कुशीनगर आदि जिलों समेत बिहार के जिले सीवान, छपरा, गोपालगंज, पश्चिम चम्पारण आदि में बाटी चोखा गरीब लोगों का मुख्य भोजन हुआ करता था। लेकिन आज बदलते जमाने में गरीबों का यह भोजन बड़े शहरों के पांच सितारा होटलों से लेकर शादी समारोहों में भी परोसा जाने लगा है।
वरिष्ठ पत्रकार एमपी विशारद ने बताया कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर बाटी चोखा के शौकीन थे।
उन्होंने गरीबों के इस भोजन को पूर्वांचल से बाहर ले जाकर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंचाया। इसके साथ ही लुटियन दिल्ली में भी बाटी चोखा ने अपनी जगह बना ली। समिटती दूरियों के इस दौर में बाटी चोखा कोलकाता, दिल्ली, लखनऊ, पटना के साथ मुम्बई और गुजरात के अहमदाबाद में भी दुकानों पर आसानी से मिल जाया करता है।
विशारद का कहना है कि बाटी-चोखा स्वास्थ्य के द्दष्टिकोण से भी बेहतर भोजन माना जाता है, क्योंकि इसमें घी,तेल तथा मसालों का प्रयोग बहुत कम मात्रा में होता है। इसलिये इसके जायके का लुत्फ डायबिटीज और बल्ड प्रेशर के मरीज भी ले सकते हैं।
देवरिया शहर में बाटी चोखा की 30 से अधिक दुकाने हैं, जहां लोग शौकिया तौर पर भोजन करते दिखाई पड़ते हैं। बाटी चोखा के दुकानदार दादा ने बताया कि उनकी दुकान पर अमीर – गरीब सब एक साथ बड़े चाव से खाते हैं।
