लखनऊ: सावधान! राजधानी में आवारा कुत्तों की भरमार…रात में जरा संभलकर निकले
लखनऊ। राजधानी में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हाल यह है कि शहर की सड़कें रात में इनके हवाले रहती हैं। कुत्तों के झुंड देखकर राहगीरों में भय का माहौल बन रहा है। लखनऊ के कई क्षेत्रों में कई ऐसी घटनाएं भी घटित हुई हैं जिनमें आवारा कुत्तों ने राह चलते …
लखनऊ। राजधानी में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हाल यह है कि शहर की सड़कें रात में इनके हवाले रहती हैं। कुत्तों के झुंड देखकर राहगीरों में भय का माहौल बन रहा है। लखनऊ के कई क्षेत्रों में कई ऐसी घटनाएं भी घटित हुई हैं जिनमें आवारा कुत्तों ने राह चलते लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया।
ऐसे में रात में सड़कों पर आवारा कुत्तों का कब्जा होने के चलते रहागीरों को थोड़ा संभलकर निकलना होगा। क्योंकि नगर निगम का आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी करने का अभियान केवल लखनऊ के वीआईपी इलाकों तक सीमित है। शहर के बाकी क्षेत्रों में बस कागजी खानापूर्ति की जा रही है।
लखनऊ में दो वर्ष पहले के सर्वे में 75 हजार आवारा कुत्तें
दो साल पहले वर्ष 2020 में नगर निगम द्वारा निजी संस्था से राजधानी में आवारा कुत्तों की संख्या को लेकर सर्वे कराया था। सर्वे संस्था एचएसआईआई की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में आवारा कुत्तों की संख्या 75 हजार बतायी गई। कार्यदायी संस्था एचएसआईआई (ह्यूमन सर्विस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) ने वर्ष 2019 सितबंर में कुत्तों की नसबंदी करने का करार नगर निगम से किया था।
लेकिन अनुबंध के करीब चार वर्ष बाद भी संस्था 50 प्रतिशत के आसपास ही आवारा कुत्तों की नसबंदी का कार्य कर पायी है। ऐसे में दो साल में आवारा कुत्तों की संख्या में और बढ़ोत्तरी हो गई है लेकिन नगर निगम का अभियान तेजी नहीं पकड़ पा रहा है।
छह गाड़ी और 45 सदस्य टीम फिर भी अभियान की गति धीमी
नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार राव ने बताया कि कार्यदायी संस्था ह्यूमन सर्विस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एचएसआईआई) की 45 सदस्य टीम छह गाड़ियों के साथ राजधानी में आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करने के कार्य में जुटी है। जोन तीन, चार व सात में अभियान लगभग पूरा होने की स्थिति में है। बाकी जोन में भी योजनाबद्ध तरीके से कार्ययोजना को परवान चढ़ाया जा रहा है। 45 सदस्य दल में कुत्तों की नसबंदी करने वाले आठ चिकित्सक शामिल हैं।
नगर निग के सभी आठ जोन में संस्था कार्य कर रही है। जोन-एक में कुत्तों की संख्या अधिक है, वहां कई टीमें लगाकर अभियान में तेजी लायी जाएगी। शहर में लगभग 37 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है लेकिन अभी कोई जोन पूरा नहीं हुआ है। मात्र वीआईपी इलाकों में ही अभियान नहीं चलाया जा रहा। सभी जोन में टीम कार्य कर रही हैं, कुत्तों को एंटी रैबीज की डोज देने के साथ ही उनकी नसबंदी की जा रही है…डॉ. नीजर कुमार, प्रबंधक एचएसआईआई।
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