बरेली: झपकी से अनियंत्रित हुई एम्बुलेंस, गेट काटकर निकाले गए शव

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बरेली, अमृत विचार। चालक को आई नींद की झपकी ने सात लोगों की पल भर में जान ले ली। हादसा इतना भीषण था कि एम्बुलेंस पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। उसके दरवाजे बंद हो गए थे। पुलिस ने शवों को बाहर निकालने का प्रयास किया। कुछ लोगों को खिड़की के सहारे तो कुछ को एम्बुलेंस का …

बरेली, अमृत विचार। चालक को आई नींद की झपकी ने सात लोगों की पल भर में जान ले ली। हादसा इतना भीषण था कि एम्बुलेंस पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। उसके दरवाजे बंद हो गए थे। पुलिस ने शवों को बाहर निकालने का प्रयास किया। कुछ लोगों को खिड़की के सहारे तो कुछ को एम्बुलेंस का दरवाजा काटकर बाहर निकाला गया। एक ही परिवार में हुईं छह मौतों से कोहराम मच गया। मेंहदी हसन रविवार रात एम्बुलेंस लेकर बरेली से निकले थे। खुर्शीद ने एम्स में पत्नी को दिन में दिखाया।

भर्ती न होने के कारण वह लोग रात तक वहां पर भटकते रहे। अंत में रात में लगभग एक बजे सभी लोग बरेली आने के लिए निकले। इस बीच चालक मेंहदी खान की नींद पूरी न होने के कारण उसे झपकी आ गई। इससे एम्बुलेंस अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़कर दूसरी ओर पहुंच गई और कैंटर से टकरा गई। एम्बुलेंस में सवार सभी लोगों की सांसें थम गईं।

सीएम ने ट्ववीट कर शोक प्रकट किया
घटना की जानकारी होने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के आफिस से ट्वीट से बरेली में हुई सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मौत को जनहानि बताते हुए शोक प्रकट किया गया। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

पुलिस की सतर्कता से नहीं लगा जाम
हादसे के बाद सड़क पर वाहन खड़े होने के कारण जाम लगने लगा। पुलिस ने पहले तो वाहनों को हादसे वाली सड़क पर आने से रोक दिया और फिर वहां से एक रूट पर डायवर्ड करके निकाला। इसके बाद तुरंत एनएचएआई की क्रेन से दोनों वाहनों को रोड से हटाकर थाने में खड़ा करा दिया। पुलिस की सतर्कता के चलते वहां ज्यादा देर तक जाम नहीं लग सका।

परिजनों को मिले आर्थिक मदद
ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से आर्थिक मदद की मांग की है। संस्था के पदाधिकारियों ने डीएम शिवाकांत द्विवेदी को अवगत कराया कि सड़क हादसे में गांव लभेड़ा मस्जिद के इमाम शाकिर रजा के भाई भाभी के साथ 6 रिश्तेदारों की मौत हुई है। अब उनके घर में बच्चे ही बचे हैं। लिहाजा, उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

खुशियां मातम में तब्दील, अब रोजी रोटी का संकट
फतेहगंज पश्चिमी इलाके के नेशनल हाईवे पर शंखा पुल के पास हादसे में जान गंवाने वाले एम्बुलेंस चालक मेंहदी हसन के भाई की सगाई की खुशियां गम में तब्दील हो गईं। परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मेंहदी हसन गांव के भूरा खां की एम्बुलेंस चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। वह सात भाइयों में सबसे बड़े थे। उसके सात वर्षीय बेटा अनस व पांच वर्षीय बेटी सोफिया है। घर में खुशियां मनाई जा रहीं थीं। क्योंकि मेंहदी हसन के भाई शराफत खां की 25 जून को सगाई थी।

श्रमिक का बिखर गया परिवार, आर्थिक संकट गहराया
हादसे में श्रमिक खुर्शीद का पूरा परिवार ही बिखर गया है। खुर्शीद, उनकी पत्नी समीरन और बड़ा बेटा आरिफ (18) की जान चली गई। अब उनके परिवार में चार बेटियां शायराबानो, साहिबा, ताहिरा, ऐनुल और आठ साल का बेटा अशरफ बचा है। बेटियों में ऐनुल का निकाह हो चुका है। हादसे में एक साथ सात लोगों के मरने से शोक छाया हुआ है।

बरेली से बीफार्मा कर रहा था आरिफ
खुर्शीद खां का बड़ा बेटा आरिफ बरेली से बीफार्मा की पढ़ाई कर रहा था। किसी तरह से परिवार उसकी पढ़ाई करवा रहा था। उससे परिवार को कई उम्मीदें थीं। श्रमिक का भतीजा जफर परिवार के साथ 25 मई को दिल्ली नहीं गया था। उसे जब पता चला कि बीमार समीरन को एम्स में भर्ती करने के लिए 30 मई की तारीख दी गई है तो वह उसी दिन दिल्ली पहुंच गया था।

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