पीलीभीत: एसीएमओ की जांच में गलत, फिर भी सीएमओ ने किया पंजीकरण, अब डीएम ने कराया सील
पीलीभीत/पूरनपुर, अमृत विचार। वैसे तो स्वास्थ्य विभाग अपने अजब-गजब कारनामों के लिए हमेशा चर्चा में बना रहता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। झोलाछापों पर शिकंजा कसने के लिए डीएम के निर्देशन में चल रही कार्रवाई में भी खेल हो गया। मेडिकल स्टोर की आड़ में बिना पंजीकरण के अस्पताल चल रहे …
पीलीभीत/पूरनपुर, अमृत विचार। वैसे तो स्वास्थ्य विभाग अपने अजब-गजब कारनामों के लिए हमेशा चर्चा में बना रहता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। झोलाछापों पर शिकंजा कसने के लिए डीएम के निर्देशन में चल रही कार्रवाई में भी खेल हो गया। मेडिकल स्टोर की आड़ में बिना पंजीकरण के अस्पताल चल रहे संचालक के खिलाफ एसीएमओ ने अपनी निरीक्षण आख्या में कार्रवाई की संस्तुति की थी।
मगर, इसके बाद भी सीएमओ की ओर से इस अस्पताल का पंजीकरण कर दिया गया। मगर, एसीएमओ की निरीक्षण आख्या के आधार पर डीएम ने दोबारा से अस्पताल पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस पर एसडीएम की अगुवाई अस्पताल को सील कर दिया है। अब सवाल उठाता है कि अगर अस्पताल गलत था तो एसीएमओ की रिपोर्ट देने के बाद भी उसका पंजीकरण किसके दबाव में किया गया था।
नगर के बंडा बस स्टैंड के समीप एक मेडिकल स्टोर संचालक की ओर से अस्पताल की शुरूआत की गई थी। उनके द्वारा दिल्ली के डॉक्टर की डिग्री के आधार पर अस्पताल का पंजीकरण करने के लिए आवेदन किया था। इसकी जांच करने के लिए 20 मई को एसीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी वहां पहुंचे थे। मगर, वहां के हालत देखकर वह दंग रह गए। पंजीकरण होने से पहले ही मेडिकल संचालक के द्वारा अक्षय मेमोरियल के नाम से अस्पताल चलाया जा रहा था।
इतना ही नहीं वहां बढ़ी संख्या में मरीज, दवाएं, इंजेक्शन मिले थे। जब उन्होंने डॉक्टर के बारे में पूछा तो नहीं आने की बात कही। इस पर एसीएमओ ने पंजीकरण की गई आवेदन की फाइल दिखाने के लिए कहा तो फाइल में लगी एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री पर उन्हें संदेह है। अस्पताल का पंजीकरण कराने के लिए जिस डॉक्टर की डिग्री का इस्तेमाल किया गया है। वह दिल्ली का रहने वाला है। जोकि एक पैथोलॉजिस्ट बताया जा रहा है। जिसे एमबीबीएस दिखाया जा रहा है।
ऐसे में तमाम तरह के सवाल उठना शुरू हो गए। इसको लेकर एसीएमओ की ओर से आवेदन करने वाले डॉक्टर को पत्र भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि वह अपनी डिग्री की मूल प्रतियां लेकर कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। इधर, एसीएमओ ने अपनी निरीक्षण आख्या तैयार डीएम और सीएमओ को भेज दी, मगर इसी बीच अस्पताल का संचालन करने वाले व्यक्ति ने दिल्ली के डॉक्टर की फाइल को निरस्त करने के बाद अब लखीमपुर के डॉक्टर हरीश भारती और एक अन्य डॉक्टर के नाम पर पंजीकरण करने के लिए आवेदन कर दिया।
जिस पर साठगांठ के चलते उसका पंजीकरण कर दिया गया। लेकिन जब एसीएमओ की रिपोर्ट डीएम पुलकित खरे की टेबल पर पहुंची तो निरीक्षण आख्या देखने के बाद डीएम ने शुक्रवार को एसडीएम पूरनपुर राकेश गुप्ता और एमओआईसी डॉ. एच एच अंसारी को अस्पताल सील करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर पहुंची टीम ने अस्पताल में छापा मारा। जहां बढ़ी संख्या में मरीज बैठे और कई मरीज भर्ती मिले। जिनका इलाज करने के लिए कोई भी प्रशिक्षित डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। इतना ही नहीं जिनके नाम पर अस्पताल पंजीकरण मिला। वह डॉक्टर भी अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। इस पर सभी मरीजों को अन्य अस्पताल भिजवाने के बाद उसे सील कर दिया है। जिसकी रिपोर्ट बनाकर डीएम को भेजी गई है। पंजीकरण होने के बाद हुई कार्रवाई के बाद नगर में हड़कंप मच गया है।
उच्चधिकारियों के निर्देश पर अस्पताल पर छापा मारा गया था। जहां कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। जबकि कई मरीज भर्ती मिले। साथ ही जो स्टाफ इलाज में लगा था। वह प्रशिक्षित नहीं था। अस्पताल का संचालन करने वाले डॉक्टर भी गायब थे। इसलिए इसको सील कर दिया है। आगे की कार्रवाई उच्चधिकारियों के स्तर से की जाएगी—डॉ. एच. एच. अंसारी, एमओआईसी।
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