बहराइच: नौकरी जाने के डर से मेडिकल कॉलेज के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने प्रशासन के विरुद्ध की नारेबाजी, सीएम को भेजा ज्ञापन

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बहराइच। मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 से काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाएगा। बल्कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया जायेगा। इसकी जानकारी मिलने पर सभी कर्मी शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पर सभी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। सभी …

बहराइच। मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 से काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाएगा। बल्कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया जायेगा। इसकी जानकारी मिलने पर सभी कर्मी शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पर सभी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। सभी का कहना है कि उन्हें नौकरी से निकाला जाएगा तो सभी आत्महत्या को मजबूर होंगे।

शहर में स्थित महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में वर्ष 2019 में आउट सोर्सिंग एजेंसी के 300 महिला और पुरुष स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती हुई थी। सभी ने अपने काम को बखूबी निभाया। कोरोना काल में आउट सोर्सिंग कर्मियों ने लगातार सेवाएं दी। अब तीन वर्ष इन सभी कर्मियों के नौकरी को होने वाले हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन सभी को नियमित करने के बजाए दूसरे कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है। इसका पत्र 31 मई को चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी किया गया।

इसकी जानकारी होते ही सभी शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंच गए। सभी कर्मियों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। सभी जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से मिलने के लिए एकत्रित हुए। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा जल शक्ति मंत्री से मुलाकात नहीं करने दिया गया। सभी संविदा कर्मियों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।

सभी का कहना है कि हम सभी ने मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाया है। इसके बाद भी उन्हें नौकरी से निकाल कर उनके स्थान पर दूसरे की भर्ती करना अन्याय है। प्रदर्शन के बाद सभी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट ज्योति राय को दिया। इस दौरान सभी आउट सोर्सिंग कर्मी मौजूद रहे।

तीन वर्ष बाद होते हैं नियमित

स्वास्थ्य विभाग में जिन कर्मियों की तैनाती एजेंसी के माध्यम से होता है। उन्हे तीन वर्ष नौकरी करने के बाद अनुभव, कार्य क्षमता के आधार पर नियमित किया जाता है। लेकिन नियमित करने के बजाए उनके स्थान पर दूसरे को सरकारी कर्मी के रूप में तैनाती देने की प्रक्रिया चल रही है।

शासन के नियमानुसार होते हैं काम

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनिल के साहनी ने बताया कि किसी कर्मचारी को हटाया नहीं गया है। सभी आज भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन का जो नियम निर्देश आएगा, उसी के तहत भर्ती होगी।

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