लखनऊ मंडल के सभी जिलों में 11 दिनों तक सभी अस्पतालों में दवा वितरण प्रभावित होने की जताई जा रही आशंका, जानें वजह?

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लखनऊ। लखनऊ मंडल में आने वाले जिलों में करीब 11 दिनों तक अस्पतालों में दवा का वितरण प्रभावित रहने की आशंका जतायी जा रही है। बताया जा रहा है कि लखनऊ मंडल के सभी जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्ट 8 जून से 18 जून तक लगातार 11 दिन अपने …

लखनऊ। लखनऊ मंडल में आने वाले जिलों में करीब 11 दिनों तक अस्पतालों में दवा का वितरण प्रभावित रहने की आशंका जतायी जा रही है। बताया जा रहा है कि लखनऊ मंडल के सभी जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्ट
8 जून से 18 जून तक लगातार 11 दिन अपने चिकित्सालय से लखनऊ आ जाएंगे और लखनऊ में आकर स्वास्थ्य कार्यकर्ता के अभिलेखों की जांच करेंगे।

दरअसल, निदेशक प्रशासन के आदेश के बाद लखनऊ मंडल के सभी जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्ट राजधानी में 11 दिनों तक रहेंगे। इस दौरान अस्पतालों में दवा वितरण कार्य कैसे होगा, इसका कोई जिक्र निदेशक द्वारा नहीं किया गया है। फार्मेसी एक्ट के मुताबिक केवल फार्मासिस्ट ही औषधि वितरण कर सकते हैं उनकी अनुपस्थिति में कोई भी गैर फार्मेसिस्ट औषधियों का वितरण नहीं कर सकता।

फार्मासिस्ट एक तकनीकि पोस्ट है उन्हें मिनिस्ट्रियल कार्यों में लगायो जाने पर सवाल उठ रहे हैँ । निदेशक के आदेश के अनुसार 17713 अभ्यर्थियों के सत्यापन 8 जून से प्रारंभ होकर 18 जून तक चलेंगे,7 तारीख को 2:30 बजे सभी फार्मेसिस्ट लखनऊ आ जाएंगे। लखनऊ के 56 फार्मेसिस्ट जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत है, हरदोई के 87 , रायबरेली के 84 और सीतापुर के 40 फार्मेसिस्ट लखनऊ में आकर प्रपत्रों की जांच करेंगे और सबसे बड़ी बात तो यह है कि उनके रुकने खाने पीने की कोई व्यवस्था का जिक्र पत्र में नहीं है ।

लखनऊ में ही लगभग 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सभी फार्मेसिस्ट ड्यूटी पर है। फार्मासिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश फार्मेसी कौंसिल के पूर्व चेयरमैन सुनील यादव ने कहा कि बिना फार्मेसिस्ट के औषधि वितरण कराया जाना एक्ट के विपरीत है, और यह लगातार 11 दिनों में औषधि वितरण का प्रभावित होना जनता के हितों के प्रतिकूल होगा।

वहीं फार्मासिस्ट के रहने खाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, इतनी बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों के फार्मासिस्ट लखनऊ आएंगे तो उनके रहने, खाने आदि की व्यवस्था का जिक्र इस आदेश में किया जाना चाहिए था। प्रपत्रों की जांच में मिनिस्ट्रियल संवर्ग के लोग के साथ अन्य संवर्गों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए थी। फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लगाना नियमों के विपरीत है।

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