बरेली: मोबाइल गेम की दीवानगी बच्चों को कर रही बीमार
अमृत विचार, बरेली। आपके घर में अगर बच्चा कई घंटे तक मोबाइल पर गेम खेलने में व्यस्त है तो सतर्क जो जाइए, ये आदत बच्चे को बीमारी के साथ ही उसके व्यवहार को भी बदल सकती है, जो भविष्य में काफी गंभीर असर डाल सकती है। जब एक बार बच्चों को मोबाइल की लत लग …
अमृत विचार, बरेली। आपके घर में अगर बच्चा कई घंटे तक मोबाइल पर गेम खेलने में व्यस्त है तो सतर्क जो जाइए, ये आदत बच्चे को बीमारी के साथ ही उसके व्यवहार को भी बदल सकती है, जो भविष्य में काफी गंभीर असर डाल सकती है। जब एक बार बच्चों को मोबाइल की लत लग जाती है तो फिर मोबाइल फोन न देने पर गुस्सा करना, रोना, चीखना और चिल्लाना आम बात हो जाती है। हाल ही में लखनऊ में मोबाइल पर गेम खेलने से मना करने पर बच्चे ने मां को गोली मार दी थी।
जिला अस्पताल के मन कक्ष में कुछ ऐसे केस आ रहे हैं। एक केस में तो मोबाइल पर गेम खेलने से मना करने बच्चे ने मां पर चाकू तान दिया। वहीं, कही बच्चों ने अपने परिजनों से मारपीट तक कर डाली। मनोचिकित्सक के अनुसार शौकिया तौर पर कुछ देर गेम खेलने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब यह शौक एक बुरी लत में बदल जाता है, जिसे गेमिंग की लत या फिर गेमिंग डिसआर्डर भी कहते हैं।
अभिभावक रहें सतर्क
खासकर कोविड के बाद जिस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है, उसमें बच्चों को पूरी तरह से टेक्नोलाजी से दूर नहीं किया जा सकता है, लेकिन अभिभावकों को यह ध्यान रखना ही होगा कि बच्चों को कितनी देर के लिए स्मार्टफोन देना है। आमतौर पर देखा गया है कि जिन बच्चों में गेमिंग की लत होती है, उनकी शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो जाती हैं। फिर वे जहां जाते हैं, उनके हाथ में फोन जरूर होता है। वे सबसे कट कर रहने लगते हैं। रात में सोने के समय भी छिपकर गेम खेलते हैं। इस तरह की चीजें बच्चों में दिखने लगें तो अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए।
किशोर वर्ग सबसे अधिक चपेट में
मन कक्ष प्रभारी के अनुसार स्कूल कॉलेजों के अवकाश के दौरान गेमिंग की लत के मामले बढ़ जाते हैं। आम दिनों में जहां माह में 12 से 20 केस ऐसे आते हैं लेकिन अवकाश के दौरान हर माह यह संख्या बढ़कर 30 से 40 पहुंच जाती है। काउंसिलिंग के दौरान गेमिंग की लत में किशोर वर्ग यानी 12 से 17 वर्ग तक के बच्चे अधिक चपेट में है।
केस 1
तीन माह पूर्व शहर के राजेंद्र नगर निवासी एक 14 वर्षीय बच्चा दिन में अधिकांश समय मोबाइल पर गेम खेलता रहता था, इस पर बच्चे की मां ने उससे फोन छीन लिया। गुस्साए बच्चे ने किचिन में काम कर रही मां पर चाकू तान दिया। बच्चा इतने गुस्से में था कि मां ने कोई हरकत नहीं कि और अगले ही दिन मन कक्ष में बच्चे की काउंसिलिंग कराना शुरू कर दी। हालांकि, अब बच्चे की लत काफी हद तक दूर हुई है।
केस -2
शहर के सुभाष नगर निवासी एक दंपति 10 दिन पहले मन कक्ष में 16 वर्षीय बेटे को लेकर आए। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चे को मोबाइल दिलाया था, लेकिन अब बच्चा ऑनलाइन गेम खेलने का आदी हो गया है। बीते दिन उसे गेम खेलने से मना किया तो वह मारपीट करने पर उतारू हो गया।
ऐसे करें डिजिटल डिटोक्स
– आपके द्वारा पूछे जाने पर बच्चा अगर अचानक मोबाइल की स्क्रीन बदल दे तो सतर्क हो जाएं
– बच्चा ऑनलाइन गेम खेलता है, उस एप की ऐज रेटिंग जरूर जांच लें
– अगर कोई गेम आपके बच्चे की उम्र के लिए सही नहीं है तो उसे वह गेम बिल्कुल भी खेलने न दें
– कभी-कभी परिजन भी बच्चे के साथ ऑनलाइन गेम खेलें, ताकि बच्चे का व्यवहार पता चल सके
– बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताएं
डॉ. आशीष, प्रभारी मन कक्ष-
मोबाइल गेमिंग की लत बच्चों पर इस कदर हावी है कि वे परिजनों से अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। कुछ केसों में तो बच्चे परिजनों से मारपीट करने पर उताऊ हो गए। ऐसे में परिजनों को जागरूक होने की जरूरत है। डिजिटल डिटोक्स के माध्यम से बच्चों की यह लत धीरे-धीरे दूर की जा सकती है।
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