उत्तराखंड मंत्रालय का सेवानिवृत्त अधिकारी दिल्ली में चला रहा था फर्जी बैंक, हल्द्वानी कोतवाली में दर्ज हुई रिपोर्ट
हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड मंत्रालय से सेवानिवृत्त अधिकारी ने दिल्ली में जालसाजी का जाल फैलाया और कई लोगों को अपना शिकार बना लिया। आरोप है कि सेवानिवृत्त अधिकारी ने परिवार के साथ मिलकर करीब पांच हजार लोगों को अपने जाल में फंसाया और 35 से 40 करोड़ का गबन कर दिया। डीजीपी के आदेश पर …
हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड मंत्रालय से सेवानिवृत्त अधिकारी ने दिल्ली में जालसाजी का जाल फैलाया और कई लोगों को अपना शिकार बना लिया। आरोप है कि सेवानिवृत्त अधिकारी ने परिवार के साथ मिलकर करीब पांच हजार लोगों को अपने जाल में फंसाया और 35 से 40 करोड़ का गबन कर दिया। डीजीपी के आदेश पर इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
इस मामले में सर्फावाद गांव नोएडा उत्तर प्रदेश निवासी रोहित कुमार सिंह व स्कूल ब्लॉक शकरपुर दिल्ली निवासी सीमा कोहली पत्नी अभिषेक कोहली ने एक हफ्ता पहले डीजीपी अशोक कुमार से मुलाकात की। रोहित और सीमा ने आरोप लगाते हुए बताया कि मूलरूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले सुरेश पाठक शकरपुर पूर्वी दिल्ली में रहते थे और वहीं उत्तराखंड मंत्रालय में तैनात थे और मुम्बई से ट्रांसफर हुए। दिल्ली में उन्होंने अपने घर से अविघ्न इण्डिया फाइनेन्सियल सर्विस नाम से प्राइवेट बैंक शुरू किया। जिसमें साल के 12 हजार जमा करने पर 18 हजार मिलते थे।
इस प्राइवेट बैंक में रोहित ने भी हर माह हजार रुपए जमा किए और पहले साल में उन्हें पूरी रकम मिल गई, लेकिन इसके बाद धांधली शुरू हुई। रोहित पैसा जमा करते रहे और डेढ़ साल गुजर गए। ऐसा करके उनके 25 लाख फंस गए। इसी तरह सीमा कोहली और अंकुर सोनी के 11-11 लाख फंस गए। आरोप है कि पैसे मांगने पर आरोपी टाल-मटोल करते रहे। रोहित का कहना है कि सुरेश की कंपनी में सुरेश के साथ उनके बेटे अंकुर व यश डायरेक्टर थे और अपने घर से ही बैंक का संचालन करते थे।
आरोप है कि इस कंपनी में तकरीबन पांच हजार लोगों ने अपना पैसा लगाया और कंपनी का सालाना टर्नओवर 35 से 40 करोड़ के करीब था। कुछ दबंग लोगों ने पैसे के एवज में सुरेश का दिल्ली वाला मकान अपने नाम करा लिया, लेकिन और लोगों के पैसे फंस गए। जिसके बाद पीड़ित एक सप्ताह पहले डीजीपी से मिले और सुरेश पाठक, शेलेंद्र कुमार और प्रियांशु के खिलाफ लिखित शिकायत दी। डीजीपी अशोक कुमार के आदेश पर हल्द्वानी कोतवाली में सभी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
विवाद के चलते रोकी गई सुरेश की पेंशन
मामले के पीड़ित रोहित का कहना है कि सुरेश मंत्रालय में उच्च पद पर आसीन थे और मुम्बई से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें मिलने वाली पेंशन रोक दी गई। रोहित का आरोप है कि उन पर गंभीर आरोपों की जांच के चलते पेंशन रोकी गई है। हालांकि रोहित यह नहीं बता सके कि उन पर किस तरह के आरोप थे।
प्रियांशू के साथ स्टॉक मार्केट में पैसे लगाता था अंकुर
रोहिता का कहना है कि सुरेश का बेटा अंकुर पहले नोएडा में कंपनी चलाने वाले वरुण कुमार का पार्टनर था। ये कंपनी स्टॉक मार्केट में पैसा लगाती थी, लेकिन बाद में दोनों पार्टनर के बीच कुछ विवाद हो गया और वो अलग हो गए। जिसके बाद अंकुर ने परिवार संग मिलकर अपना प्राइवेट बैंक खोल लिया।
